पता सफ़र में हवा ने नहीं दिया!

मंज़िल, इस महक की कहाँ किस चमन में है,
इसका पता सफ़र में हवा ने नहीं दिया|

मुनीर नियाज़ी

बोझ अँधियारों का है मौला खैर!

सर पर बोझ अँधियारों का है मौला खैर,
और सफ़र कोहसारों का है मौला खैर|

राहत इन्दौरी

मंज़िल गुमान में रखना!

सफ़र को जब भी किसी दास्तान में रखना,
क़दम यकीन में, मंज़िल गुमान में रखना |

निदा फ़ाज़ली

चली साथ में बिटिया की हँसी!

घर से निकला तो चली साथ में बिटिया की हँसी,
ख़ुशबुएँ देती रही नन्हीं कली मीलों तक|

कुंवर बेचैन

सफ़र जारी रखो!

राह के पत्थर से बढ़कर कुछ नहीं हैं मंज़िलें,
रास्ते आवाज़ देते हैं, सफ़र जारी रखो|

राहत इन्दौरी

कहाँ के हैं, किधर के हम हैं!

वक़्त के साथ है मिट्टी का सफ़र सदियों से,
किसको मालूम, कहाँ के हैं, किधर के हम हैं |

निदा फ़ाज़ली

छोटे-छोटे पाँव!

एक तो लंबा सफर दूसरे ये कठिनाई है,
छोटे-छोटे पाँव ज़िंदगी लेकर आई है|

रमेश रंजक