पड़ोसी के घर आया होगा!

दिल-ए-नादाँ न धड़क ऐ दिल-ए-नादाँ न धड़क,
कोई ख़त ले के पड़ोसी के घर आया होगा|

कैफ़ भोपाली

ए ज़िंदगी, थोड़ा तो दम ले ले!

ज़रूर एक नींद मेरे साथ ए मेहमान अ ग़म ले ले,
सफ़र दरवेश है ए ज़िंदगी, थोड़ा तो दम ले ले|

कैफ़ी आज़मी

मिरे साथ जलते जलते!

शब-ए-इंतिज़ार आख़िर कभी होगी मुख़्तसर भी,
ये चराग़ बुझ रहे हैं मिरे साथ जलते जलते|

कैफ़ी आज़मी

जो कही गई है मुझ से!

जो कही गई है मुझ से वो ज़माना कह रहा है,
कि फ़साना बन गई है मिरी बात टलते टलते|

कैफ़ी आज़मी

यूँही कोई मिल गया था!

यूँही कोई मिल गया था सर-ए-राह चलते चलते,
वहीं थम के रह गई है मिरी रात ढलते ढलते|

कैफ़ी आज़मी

हमने ख़ुद-कुशी कर ली!

वो जिनको प्यार है चाँदी से इश्क़ सोने से,
वही कहेंगे कभी हमने ख़ुद-कुशी कर ली|

कैफ़ी आज़मी

नज़र मिली भी न थी और !

नज़र मिली भी न थी और उन को देख लिया,
ज़बाँ खुली भी न थी और बात भी कर ली|

कैफ़ी आज़मी

काँटों से दोस्ती कर ली!

मिले न फूल तो काँटों से दोस्ती कर ली,
इसी तरह से बसर हम ने ज़िंदगी कर ली|

कैफ़ी आज़मी