सिर्फ़ ख़य्याम का घर हो!

मय-कशी के लिए ख़ामोश भरी महफ़िल में,
सिर्फ़ ख़य्याम का घर हो ये ज़रूरी तो नहीं|

ख़ामोश ग़ाज़ीपुरी

सब पे साक़ी की नज़र हो!

सब की नज़रों में हो साक़ी ये ज़रूरी है मगर,
सब पे साक़ी की नज़र हो ये ज़रूरी तो नहीं|

ख़ामोश ग़ाज़ीपुरी

नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है!

नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है,
उनकी आग़ोश में सर हो ये ज़रूरी तो नहीं |

ख़ामोश ग़ाज़ीपुरी

या लब-ए-साग़र से पियो!

चश्म-ए-साक़ी से पियो या लब-ए-साग़र से पियो,
बे-ख़ुदी आठों पहर हो ये ज़रूरी तो नहीं|

ख़ामोश ग़ाज़ीपुरी

उम्र जल्वों में बसर हो–

उम्र जल्वों में बसर हो ये ज़रूरी तो नहीं,
हर शब-ए-ग़म की सहर हो ये ज़रूरी तो नहीं|

ख़ामोश ग़ाज़ीपुरी