मिरा घर तो है दरवाज़ा नहीं!

कोई भी दस्तक करे आहट हो या आवाज़ दे,
मेरे हाथों में मिरा घर तो है दरवाज़ा नहीं|

वसीम बरेलवी

खुल जाओ किसी दिन!

राज़ों की तरह उतरो मिरे दिल में किसी शब,
दस्तक पे मिरे हाथ की खुल जाओ किसी दिन|

अमजद इस्लाम अमजद

दस्तक देने ये कौन आया है!

दिल पर दस्तक देने ये कौन आया है,
किसकी आहट सुनता है वीराने में।

गुलज़ार