देती है खुशी कई गम भी!

सप्ताहांत में लोग आराम के मूड में रहते हैं, ऐसे में मस्तिष्क पर ज्यादा बोझ नहीं डालना चाहिए| मैं देखता हूँ कि शनिवार-रविवार को पोस्ट करने वालों और पोस्ट पढ़ने वालों की संख्या भी कम होती है|

खैर आज मैं 1964 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘कोहरा’ का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| क़ैफी आज़मी साहब के लिखे इस गीत को हेमंत कुमार साहब ने अपने ही संगीत में निराले अंदाज़ में गाया है| हेमंत दा की आवाज़ वैसे ही लाजवाब थी और यह गीत तो लगता है कि जैसे उनकी आवाज़ में गाये जाने के लिए ही बना था|

लीजिए प्रस्तुत है ये नायाब गीत-


ये नयन डरे-डरे, ये जाम भरे-भरे
ज़रा पीने दो,
कल की किसको खबर, इक रात हो के निडर
मुझे जीने दो|

रात हसीं, ये चाँद हसीं
तू सबसे हसीं मेरे दिलबर,
और तुझसे हसीं तेरा प्यार|
तू जाने ना|
ये नयन डरे डरे…


प्यार में है जीवन की खुशी
देती है खुशी कई गम भी,
मैं मान भी लूँ कभी हार
तू माने ना|
ये नयन डरे डरे…


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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