किसी मंदिर का दिया है यारो!

कोई करता है दुआएँ तो ये जल जाता है,
मेरा जीवन किसी मंदिर का दिया है यारो|

कृष्ण बिहारी नू

कोई घर न खुला पाओगे!

शब है इस वक़्त कोई घर न खुला पाओगे,
आओ मय-ख़ाने का दरवाज़ा खुला है यारो|

कृष्ण बिहारी नू

माज़ी ने मुझे छोड़ दिया है यारो!

मुड़ के देखूँ तो किधर और सदा दूँ तो किसे,
मेरे माज़ी ने मुझे छोड़ दिया है यारो|

कृष्ण बिहारी नूर

किताबों में लिखा है यारो!

जिसका कोई भी नहीं उसका ख़ुदा है यारो,
मैं नहीं कहता किताबों में लिखा है यारो|

कृष्ण बिहारी नूर

क़ैद से मुझ को रिहाई दे!

या ये बता कि क्या है मिरा मक़्सद-ए-हयात,
या ज़िंदगी की क़ैद से मुझ को रिहाई दे|

कृष्ण बिहारी नूर

सफ़ाई दे तो कहाँ तक सफ़ाई दे!

मुजरिम है सोच सोच गुनहगार साँस साँस,
कोई सफ़ाई दे तो कहाँ तक सफ़ाई दे|

कृष्ण बिहारी नूर

कामयाब होने पे मुझ को बधाई दे!

ऐ काश इस मक़ाम पे पहुँचा दे उसका प्यार,
वो कामयाब होने पे मुझ को बधाई दे|

कृष्ण बिहारी नूर

पुकारूँ मैं तो उसी को सुनाई दे!

काश ऐसा ताल-मेल सुकूत-ओ-सदा में हो,
उसको पुकारूँ मैं तो उसी को सुनाई दे|

कृष्ण बिहारी नू

निगाह को ऐसी रसाई दे!

देना है तो निगाह को ऐसी रसाई दे,
मैं देखता हूँ आइना तो मुझे तू दिखाई दे|

कृष्ण बिहारी नूर

बहुत अपने से डर शाम के बाद!

यही मिलने का समय भी है बिछड़ने का भी,
मुझको लगता है बहुत अपने से डर शाम के बाद|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’