पढ़कर भी क्या होगा!

हिन्दी नवगीत के एक सशक्त हस्ताक्षर स्वर्गीय कुमार शिव जी का एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| उनकी एक गीत पंक्ति जो मैंने कई बार अपने आलेखों में दोहराई है, वो है: फ्यूज बल्बों के अद्भुद समारोह में,रोशनी को शहर से निकाला गया| एक और काले कपड़े पहने हुए सुबह देखी,देखी हमने अपनी सालगिरह … Read more

हम सिगार से जला किए!

आज स्वर्गीय कुमार शिव जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ, जिसमें उन्होंने बड़े खूबसूरत तरीके से कहा है कि किस प्रकार ज़िंदगी ने हमारी हालत, राखदान में पड़े सिगार जैसी कर दी है| राखदान में सुलगता सिगार, जो मदिरा पान, संगीत और राजनैतिक गतिविधियों तथा बहस आदि का भी साक्षी बनता है| लीजिए … Read more

काले कपड़े पहने हुए सुबह देखी!

कल मैंने अपने एक संस्मरण में, एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से अन्य लोगों के साथ स्वर्गीय कुमार शिव जी को भी याद किया था और उनके एक-दो गीतों का उल्लेख किया था| आज उनको श्रद्धांजलि स्वरूप उनका एक पूरा गीत यहाँ दे रहा हूँ| इस गीत में उन्होंने अपनी खुद्दारी की प्रभावी अभिव्यक्ति … Read more

%d bloggers like this: