माँ है रेशम के कारख़ाने में!

अली सरदार जाफरी साहब की एक नज़्म आज शेयर कर रहा हूँ| इस रचना में पिछड़े वर्ग के लोगों की ज़िंदगी का ऐसा चित्रण किया गया है, जिनकी हालत पीढ़ी दर पीढ़ी एक जैसी बनी रहती है, कोई सपने नहीं, कोई बदलाव की उम्मीद नहीं है| जाफरी साहब एक प्रगतिशील शायर थे, मुद्दतों पहले उन्होंने … Read more

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