उठेगी तुम्हारी नज़र धीरे-धीरे!

आज स्वर्गीय मजरूह सुल्तानपुरी साहब का लिखा एक गीत शेयर कर रहा हूँ|
यह गीत 1963 में रिलीज़ हुई फिल्म – ‘एक राज़’ के लिए लता मंगेशकर जी ने अपने सुमधुर स्वर में गाया था| इसका मधुर संगीत तैयार किया था चित्रगुप्त जी ने|

लीजिए प्रस्तुत है, मजरूह साहब का लिखा और स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर जी का गाया यह भावपूर्ण गीत-

उठेगी तुम्हारी नज़र धीरे-धीरे,
मुहब्बत करेगी असर धीरे-धीरे|

ये माना ख़लिश है अभी हल्की-हल्की
ख़बर भी नहीं है तुम को मेरे दर्द-ए-दिल की
ख़बर हो रहेगी मगर धीरे-धीरे
उठेगी तुम्हारी नज़र …

मिलेगा जो कोई हसीं चुपके-चुपके
मेरी याद आ जाएगी वहीं चुपके-चुपके
सताएगा दर्द-ए-जिगर धीरे-धीरे
उठेगी तुम्हारी नज़र …

सुलगते हैं कब से इसी चाह में हम
पड़े हैं निगाहें डाले इसी राह में हम
कि आओगे तुम भी इधर धीरे-धीरे
उठेगी तुम्हारी नज़र …


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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तुम हमें प्यार करो या ना करो!

स्वर्गीय शैलेन्द्र जी का लिखा एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| जैसा मैंने पहले भी कहा है शैलेन्द्र जी फिल्म नगरी में विशाल बैनरों से जुड़े रहकर भी अंत तक एक जनकवि बने रहे|
यह गीत 1964 में रिलीज़ हुई फिल्म – ‘कैसे कहूँ’ के लिए लता मंगेशकर जी ने अपने सुमधुर स्वर में गाया था| इसका मधुर संगीत तैयार किया था सचिन देव बर्मन जी ने|

लीजिए प्रस्तुत है, शैलेन्द्र जी का लिखा और स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर जी का गाया यह भावपूर्ण गीत-

तुम हमें प्यार करो या ना करो,
हम तुम्हें प्यार किये जायेगें
चाहे किस्मत में ख़ुशी हो के ना हो,
गम उठाकर ही जिए जायेगें
तुम हमें प्यार करो या ना करो…

हम नहीं वो जो गमे-इश्क से घबरा जाएं
हो के मायूस जुबां पर कोई शिकवा लाये
चाहे कितना ही बढ़े दर्दे जिगर,
अपने होंठो को सिये जायेंगे
तुम हमें प्यार करो या ना करो…..

तुम सलामत हो तो हम चैन भी पा ही लेंगे
किसी सूरत से दिल की लगी लगा ही लेंगें
प्यार का जाम मिले या ना मिले,
हम तो आंसू भी पिए जायेंगें
तुम हमें प्यार करो या ना करो…


तोड़ दी आस तो फिर इतना ही एहसान करो
दिल में रहना जो ना चाहो तो नज़र ही में रहो
ठेस लगती जो है दिल पर तो लगे,
गम उठाकर ही जिए जायेगें
तुम हमें प्यार करो या ना करो


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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तुम न जाने किस जहाँ में खो गये!

गायक सोनू निगम का एक इंटरव्यू सुन रहा था, जिसमें उन्होंने स्वर्गीय लता मंगेशकर जी के एक गीत को मिसाल के रूप में याद किया था| मुझे लगा कि आज इसी गीत को शेयर कर लेना चाहिए| यह गीत है फिल्म- ‘सज़ा’ से जिसे लिखा था – साहिर लुधियानवी जी ने और इसका संगीत तैयार किया था स्वर्गीय सचिन देव बर्मन साहब ने|

लीजिए प्रस्तुत है, फिल्म- सज़ा के लिए साहिर लुधियानवी साहब का लिखा और सचिन देव बर्मन जी के संगीत निर्देशन में लता जी द्वारा लाजवाब अंदाज़ में गाया गया यह भावपूर्ण गीत-



तुम न जाने किस जहाँ में खो गये
हम भरी दुनिया में तनहा हो गये|
तुम न जाने किस जहाँ में …

एक जां और लाख ग़म,
घुट के रह जाये न दम
आओ तुम को देख लें,
डूबती नज़रों से हम
लूट कर मेरा जहाँ
छुप गये हो तुम कहाँ – २
तुम कहाँ, तुम कहाँ, तुम कहाँ
तुम न जाने किस जहाँ में …

मौत भी आती नहीं,
रात भी जाती नहीं
दिल को ये क्या हो गया,
कोई शै भाती नहीं
लूट कर मेरा जहाँ,
छुप गये हो तुम कहाँ – २
तुम कहाँ, तुम कहाँ, तुम कहाँ
तुम न जाने किस जहाँ में …

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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रुक जा रात ठहर जा रे चंदा!

स्वर्गीय शैलेन्द्र जी का एक सुंदर गीत आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| फिल्म- ‘दिल एक मंदिर’ के लिए इस गीत का संगीत शंकर जयकिशन की सुरीली जोड़ी ने दिया था और सुर सम्राज्ञी स्वर्गीय लता मंगेशकर जी ने अपनी मधुर वाणी में गाकर इस गीत को अमर कर दिया है|

लीजिए आज प्रस्तुत हैं इस मधुर गीत के बोल –

रुक जा रात ठहर जा रे चंदा
बीते न मिलन की बेला,
आज चांदनी की नगरी में
अरमानों का मेला|
रुक जा रात …

पहले मिलन की यादें लेकर
आई है ये रात सुहानी
दोहराते हैं चाँद सितारे
मेरी तुम्हारी प्रेम कहानी|
मेरी तुम्हारी प्रेम कहानी||
रुक जा रात …

कल का डरना काल की चिंता
दो तन है मन एक हमारे
जीवन सीमा के आगे भी
आऊँगी मैं संग तुम्हारे|
आऊँगी मैं संग तुम्हारे|
रुक जा रात …

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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मेरी आवाज़ ही, पहचान है!

लीजिए लता जी को विदा करने का समय भी आ गया| एक ज़माना रहा फिल्म संगीत का, जिसमें रफी साहब रहे, मुकेश जी, किशोर दा, हेमंत कुमार जी, मन्ना डे साहब आदि अनेक पुरुष गायक थे, महिला गायिकाएं भी अनेक रहीं जिनमें लता जी की छोटी बहन आशा भौंसले जी, सुमन कल्याणपुर जी, गीता दत्त जी आदि-आदि अनेक गायिकाएं थीं, लेकिन गायिकाओं में किसी का क़द लता जी के आस पास नहीं था|

याद करने लगें तो लता जी के अनेक गाने गिनाए जा सकते हैं, भले ही वे रोमांटिक हों, भजन हों, राष्ट्रभक्ति के गीत हों, हर क्षेत्र में लता जी ने नई ऊंचाइयां हासिल की थीं और सर्वाधिक गीत गाने का भी रिकॉर्ड बनाया था|

चीन से हुए युद्ध के बाद एक आयोजन में लता जी के गाये इस गीत को सुनकर पंडित नेहरू की आँखों में आंसू आ गए थे- ‘ए मेरे वतन के लोगों, ज़रा आँख में भर लो पानी, जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी’| मैं यहाँ उनके अमर गीतों की गिनती नहीं कराऊंगा क्योंकि वह संभव ही नहीं है|

स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर जी को श्रद्धांजलि स्वरूप लीजिए आज प्रस्तुत हैं फिल्म- किनारा के लिए गुलज़ार जी के लिखे इस गीत के बोल, जिसका संगीत तैयार किया था राहुल देव बर्मन जी ने, यह गीत स्वयं ही लता जी के बारे में बात कर रहा है:

नाम गुम जायेगा, चेहरा ये बदल जायेगा
मेरी आवाज़ ही, पहचान है,
गर याद रहे|

वक़्त के सितम, कम हसीं नहीं
आज हैं यहाँ, कल कहीं नहीं,
वक़्त से परे अगर, मिल गये कहीं|
मेरी आवाज़ ही …

जो गुज़र गई, कल की बात थी
उम्र तो नहीं, एक रात थी,
रात का सिरा अगर, फिर मिले कहीं|
मेरी आवाज़ ही …


दिन ढले जहाँ, रात पास हो
ज़िंदगी की लौ, ऊँची कर चलो,
याद आये गर कभी, जी उदास हो|
मेरी आवाज़ ही …


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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ऐ मेरे दिल-ए-नादान

आज मैं स्वर सम्राज्ञी, कोकिल कंठी- सुश्री लता मंगेशकर जी का गाया एक अमर गीत आपको, उसके लिखित स्वरूप के माध्यम से याद दिला रहा हूँ, आपको इस दर्द भरे गीत का स्मरण अवश्य होगा, जिसे असद भोपाली जी ने लिखा था और रवि जी के संगीत निर्देशन में लता जी द्वारा बहुत पहले गाये गए इस गीत की स्वर लहरी आज भी हमारे मानस में गूँजती है|

लीजिए प्रस्तुत हैं लता मंगेशकर जी द्वारा फिल्म- ‘टावर हाउस’ के लिए गाये गए इस गीत के बोल –

ऐ मेरे दिल-ए-नादान
तू ग़म से न घबराना,
एक दिन तो समझ लेगी
दुनिया तेरा अफ़साना|
ऐ मेरे दिल-ए-नादान …

अरमान भरे दिल में
ज़ख्मों को जगह दे दे
भड़के हुए शोलों को
कुछ और हवा दे दे,
बनती है तो बन जाए
ये ज़िन्दगी अफ़साना|
ऐ मेरे दिल-ए-नादान …


फ़रियाद से क्या हासिल
रोने से नतीजा क्या,
बेकार हैं ये बातें
इन बातों से होगा क्या,
अपना भी घडी भर में
बन जाता है बेगाना
ऐ मेरे दिल-ए-नादान …


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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दिल का खिलौना हाय टूट गया!

पंडित भारत व्यास जी के लिखे एक खूबसूरत गीत के बोल आज शेयर कर रहा हूँ| इस गीत को 1959 में रिलीज हुई फिल्म ‘गूंज उठी शहनाई’ के लिए वसंत देसाई जी के संगीत निर्देशन में लता मंगेशकर जी ने बहुत सुंदर ढंग से गाया था| इतना लंबा समय बीत जाने के बाद, आज भी यह गीत हम लोगों के दिल में बसा है|

लीजिए प्रस्तुत हैं फिल्म- ‘गूंज उठी शहनाई’ के इस मधुर गीत के बोल :

दिल का खिलौना हाय टूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया
हाय कोई लुटेरा आ के लूट गया
दिल का खिलौना हाय टूट गया|

हुआ क्या क़ुसूर ऐसा सैंया हमारा
जाते हुये जो तूने हमें ना पुकारा|
उल्फ़त का तार तोड़ा
हमें मझधार छोड़ा
हम तो चले थे ले के, तेरा ही सहारा
साथी हमारा हमसे छूट गया|

दिल का खिलौना हाय टूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया|


कैसी परदेसी तूने प्रीत लगाई
चैन भी खोया हमने नींद गँवाई,
तेरा ऐतबार करके
हाय इंतज़ार करके
ख़ुशियों के बदले ग़म की दुनिया बसाई,
ज़ालिम ज़माना हमसे रूठ गया|

दिल का खिलौना हाय टूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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रुला के गया, सपना मेरा!



कल मैंने भारतीय सिनेमा जगत के दो महान व्यक्तित्वों – राज कपूर जी को उनके जन्म दिन पर और उनके साथी और महान जनकवि शैलेन्द्र जी को उनकी पुण्य तिथि पर याद किया था|

कल मैंने राज साहब की फिल्म – ‘मेरा नाम जोकर’ का एक गीत भी उनकी स्मृति में शेयर किया था| आज मैं शैलेन्द्र जी का लिखा एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जो उन्होंने देव आनंद जी की फिल्म ‘ज्वेल थीफ’ के लिए लिखा था और इसे सचिन देव बर्मन जी के संगीत निर्देशन में लता मंगेशकर जी ने गाया था| लीजिए प्रस्तुत हैं इस गीत के बोल –


रुला के गया, सपना मेरा
बैठी हूँ कब हो सवेरा
रुला के गया, सपना मेरा
बैठी हूँ कब हो सवेरा|

वही है गम-ए-दिल, वही हैं चन्दा तारे
वही हम बेसहारे
आधी रात वही हैं, और हर बात वही हैं
फिर भी ना आया लुटेरा|

रुला के गया, सपना मेरा
बैठी हूँ कब हो सवेरा|

कैसी ये जिन्दगी, के साँसों से हम ऊबे
के दिल डूबा, हम डूबे
एक दुखिया बेचारी, इस जीवन से हारी
उस पर ये गम का अन्धेरा|

रुला के गया, सपना मेरा
बैठी हूँ कब हो सवेरा|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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मुद्दतें हो गईं मुस्कुराए!

आज एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ ज़नाब कैफी आज़मी साहब की लिखी हुई, कैफी आज़मी साहब हमारे देश के जाने माने और मशहूर शायर रहे हैं और उनकी बहुत सी रचनाओं का फिल्मों में भी सदुपयोग किया गया है|


कैफी आज़मी साहब की इस ग़ज़ल को फिल्म ‘हँसते जख्म’ के लिए मदन मोहन जी के संगीत निर्देशन में लता मंगेशकर जी ने बड़े प्रभावी ढंग से गाया था|

लीजिए प्रस्तुत है कैफी आज़मी साहब की यह ग़ज़ल –

आज सोचा तो आँसू भर आए,
मुद्दतें हो गईं मुस्कुराए|

हर कदम पर उधर मुड़ के देखा,
उनकी महफ़िल से हम उठ तो आए|

दिल की नाज़ुक रगें टूटती हैं,
याद इतना भी कोई न आए|

रह गई ज़िंदगी दर्द बनके,
दर्द दिल में छुपाए छुपाए|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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तुम रहे न तुम, हम रहे न हम!

भारतीय फिल्म संगीत की दुनिया में लता मंगेशकर जी किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं| आज मैं लता मंगेशकर जी द्वारा गुरुदत्त जी की फिल्म – ‘कागज़ के फूल’ के लिए गाये गए एक गीत के बोल शेयर कर रहा हूँ, जिसका संगीत सचिन दा अर्थात सचिन देव बर्मन जी ने दिया था|

ज़िंदगी में कई बार ऐसा होता है कि हम खुशियों की आशा करते हैं और हमारे पाले ग़म ही पड़ते हैं, इस गीत के बोल ही ऐसे हैं और फिर लता जी ने अपनी प्रस्तुति के द्वारा इसमें पूरा दर्द उंडेल दिया है|

लीजिए प्रस्तुत है लता मंगेशकर जी के स्वर में यह दर्द भरा गीत:



वक़्त ने किया क्या हसीं सितम
तुम रहे न तुम, हम रहे न हम|
वक़्त ने किया क्या हसीं सितम|
तुम रहे न तुम हम रहे न हम
वक़्त ने किया..

बेक़रार दिल इस तरह मिले
जिस तरह कभी हम जुदा न थे
तुम भी खो गए, हम भी खो गए
एक राह पर चलके दो क़दम|

वक़्त ने किया क्या हसीं सितम
तुम रहे न तुम हम रहे न हम|
वक़्त ने किया..


जाएंगे कहाँ सूझता नहीं
चल पड़े मगर रास्ता नहीं|
क्या तलाश है कुछ पता नहीं
बुन रहे हैं दिल, ख़्वाब दम-ब-दम|
वक़्त ने किया क्या हसीं सितम
तुम रहे न तुम हम रहे न हम|
वक़्त ने किया..


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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