मुझे उसने क्या लिखा होगा!

वही न मिलने का ग़म और वही गिला होगा,
मैं जानता हूँ मुझे उसने क्या लिखा होगा|

शीन काफ़ निज़ाम

ख़त लिखने की कोशिश की!

नाम मिरा था और पता अपने घर का,
उसने मुझको ख़त लिखने की कोशिश की|

गुलज़ार

अपने लहू से उसे ख़त लिखता हूँ!

रोज़ मैं अपने लहू से उसे ख़त लिखता हूँ,
रोज़ उंगली मेरी तेज़ाब में आ जाती है|

मुनव्वर राना

वो पयाम किसका था !

हमारे ख़त के तो पुर्ज़े किए पढ़ा भी नहीं,
सुना जो तू ने ब-दिल वो पयाम किसका था|

दाग़ देहलवी

आख़िर वो नाम किसका था!

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किसका था,
न था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किसका था|

दाग़ देहलवी

इसी हीले बहाने से मिले!

कभी लिखवाने गए ख़त कभी पढ़वाने गए,
हम हसीनों से इसी हीले बहाने से मिले|

कैफ़ भोपाली

काग़ज़ भिगो गईं आँखें!

ख़त का पढ़ना भी हो गया मुश्किल,
सारा काग़ज़ भिगो गईं आँखें|

नक़्श लायलपुरी