कोई इन्तहा ही नहीं!

सच घटे या बढ़े तो सच न रहे,
झूठ की कोई इन्तहा ही नहीं।

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

अजीब आज की दुनिया का व्याकरण देखा!

ज़बाँ है और बयाँ और उसका मतलब और,
अजीब आज की दुनिया का व्याकरण देखा|

नीरज