इस तरह से कर गया तन्हा मुझे!

जिस तरह वापस कोई ले जाए अपनी छुट्टियाँ,
जाने वाला इस तरह से कर गया तन्हा मुझे|

बशीर बद्र

तारों से झाँकता है मुझे!

रात तनहाइयों के आंगन में,
चांद तारों से झाँकता है मुझे|

बेकल उत्साही

तन्हाई नहीं जाने वाली!

आज सड़कों पे चले आओ तो दिल बहलेगा,
चन्द ग़ज़लों से तन्हाई नहीं जाने वाली|

दुष्यंत कुमार

अपने-आप को तन्हा किया न जाए!

हम हैं तेरा ख़याल है तेरा जमाल है,
इक पल भी अपने-आप को तन्हा किया न जाए|

जाँ निसार अख़्तर

ये वीरानी नहीं है!

खु़दा अब ले ले मुझसे मेरी दुनिया,
मेरे बस की ये वीरानी नहीं है|

राजेश रेड्डी

दूरियाँ, मजबूरियाँ, तन्हाइयाँ!

ज़िंदगी शायद इसी का नाम है,
दूरियाँ, मजबूरियाँ, तन्हाइयाँ|

कैफ़ भोपाली

हर मोड़ पे रुसवाई!

आवारा हैं गलियों में मैं और मेरी तनहाई,
जाएँ तो कहाँ जाएँ हर मोड़ पे रुसवाई|

अली सरदार जाफ़री

वज़न है सम्भलके उठाना!

ये तन्हाईयाँ, याद भी, चान्दनी भी,
गज़ब का वज़न है सम्भलके उठाना।

कन्हैयालाल नंदन

अब घर से कम निकलते हैं!

वो है जान अब हर एक महफ़िल की,
हम भी अब घर से कम निकलते हैं|

जॉन एलिया

वो भी हों तनहाई भी!

एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी,
ऐसा तो कम ही होता है वो भी हों तनहाई भी|

गुलज़ार