देख के अच्छा लगता है!

तन्हा हो तो घबराया सा लगता है,
भीड़ में उसको देख के अच्छा लगता है|

वसीम बरेलवी

कब लोग रिहाई पाएँगे!

परछाईं के इस जंगल में क्या कोई मौजूद नहीं,
इस दश्त-ए-तन्हाई से कब लोग रिहाई पाएँगे|

राही मासूम रज़ा

किसी ख़ुदा की इनायत नहीं रही!

हमने तमाम उम्र अकेले सफ़र किया,
हम पर किसी ख़ुदा की इनायत नहीं रही|

दुष्यंत कुमार

किस क़दर आइना अकेला था!

जो भी मिलता गले लगा लेता,
किस क़दर आइना अकेला था|

वसीम बरेलवी

क्या मिरा तजरबा अकेला था!

प्यार तो जन्म का अकेला था,
क्या मिरा तजरबा अकेला था|

वसीम बरेल
वी

इसलिए मैं बड़ा अकेला था!

अपने अंदाज़ का अकेला था,
इसलिए मैं बड़ा अकेला था|

वसीम बरेलवी

मेरी तरह तुझको भी तन्हा रक्खे!

हँस न इतना भी फ़क़ीरों के अकेले-पन पर,
जा ख़ुदा मेरी तरह तुझको भी तन्हा रक्खे|

अहमद फ़राज़

तन्हा हूँ तो कोई नहीं आने वाला!

तेरे होते हुए आ जाती थी सारी दुनिया,
आज तन्हा हूँ तो कोई नहीं आने वाला|

अहमद फ़राज़

पास से देखोगे अकेला होगा!

एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक,
जिसको भी पास से देखोगे अकेला होगा|

निदा फ़ाज़ली

जीने का हौसला क्यूँ है!

जो दूर दूर नहीं कोई दिल की राहों पर,
तो इस मरीज़ में जीने का हौसला क्यूँ है|

राही मासूम रज़ा