घर से निकलते क्यों हैं!

लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं,
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं|

राहत इन्दौरी

मुड़ मुड़ के देखती है अभी!

ज़िन्दगी कू-ए-ना-मुरादी से,
किसको मुड़ मुड़ के देखती है अभी|

अहमद फ़राज़

ज़िन्दगी की तरफ देखना गया!

अच्छा है जो मिला वो कहीं छूटता गया,
मुड़ मुड़ के ज़िन्दगी की तरफ देखना गया|

वसीम बरेलवी