मेरे क़ातिल ने कहीं जाम उछाले होंगे!

. आज एक बार फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ | अभिव्यक्ति, कविता, शेर-ओ-शायरी, ये सब ऐसे काम नहीं है कि जब चाहा लिख लिया और उसमें गुणवत्ता भी बनी रहे। दो शेर याद आ रहे हैं इस संदर्भ में- हम पे दुखों के पर्बत टूटे, तब हमने दो-चार कहे, उसपे … Read more

मगर वो कोई फ़ैसला तो सुना दें!

ज़नाब सुदर्शन फ़ाक़िर साहब एक श्रेष्ठ शायर रहे हैं, उनके बहुत सुंदर गीत, ग़ज़लें आदि विभिन्न गायकों ने गायी हैं| वैसे कवि शायर आदि भी अजीब लोग होते हैं, एक मामूली सी अदा के लिए वे कुछ भी कुर्बान करने को तैयार हो जाते हैं, कम से कम कविता और शायरी में तो ऐसा ही … Read more

मौला जाने क्या होगा आगे!

पुराने जमाने के अमर फिल्मी गीतों को शेयर करने के क्रम में आज मुकेश जी का गाया एक और नायाब गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ, जो मनोज कुमार जी की फिल्म से है| लीजिए प्रस्तुत है फिल्म- ‘हरियाली और रास्ता’ के लिए हसरत जयपुरी जी का लिखा यह गीत, जिसका संगीत दिया था शंकर जयकिशन … Read more

हाय हाय ये ज़ालिम ज़माना !

हिन्दी फिल्मों के गायकों के एक तरह से गुरु माने जाने वाले स्वर्गीय कुंदन लाल सहगल जी का गाया एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| एक समय था जब हर नया गायक ऊअनके गाने के ढंग की नकल करता था, यद्यपि आज वैसा कोई नहीं करता और आज वह स्वीकार्य भी नहीं होगा| मुकेश … Read more

एक मैं कि तेरे नाम से, ना-आशना आवारगी|

आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग-पोस्ट को दोहरा रहा हूँ| एक फिल्मी गाना याद आ रहा है, फिल्म थी- ’मैं नशे में हूँ’, यह गीत राज कपूर जी पर फिल्माया गया है, शैलेंद्र जी ने लिखा है, शंकर जयकिशन का संगीत और आवाज़ है मेरे प्रिय गायक मुकेश जी की। बोल हैं- हम हैं तो … Read more

सूर्यमुखी का प्रण!

अपनी रचनाओं को शेयर करने के क्रम में आज यह अंतिम पुरानी रचना है, जो बहुत प्रयास करने पर भी पूरी याद नहीं आ सकी| इसे मैं कुछ जगह इसकी तुरपाई करने के बाद प्रस्तुत कर रहा हूँ| इस रचना में मैंने जीवन के, दिन के और मौसम के तीन चरणों को एक साथ प्रस्तुत … Read more

एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम!

आज ज़नाब क़तील शिफ़ाई साहब की एक ग़ज़ल के कुछ शेर शेयर कर रहा हूँ| क़तील साहब भारतीय उपमहाद्वीप के जाने-माने शायर रहे हैं और उनकी ग़ज़लें ग़ुलाम अली साहब और जगजीत सिंह जी जैसे प्रमुख ग़ज़ल गायकों ने गाई हैं| लीजिए आज क़तील शिफ़ाई साहब की इस ग़ज़ल का आनंद लीजिए, जिसे जगजीत सिंह-चित्रा … Read more

मटरू का आना और जाना!

मटरू का पता ही नहीं चलता कि कब वो हमारे, मतलब अपने घर में रहेगा और कब बाहर चला जाएगा| एक तरह से देखा जाए तो उसको आवारा कहा जा सकता है, कभी वो रात में अपने स्थान पर सोता है और सुबह होते ही चला जाता है, और कभी रात भर गायब रहता है … Read more

पिता के नाम

आज फिर से अपनी एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट संपादित रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ| यद्यपि इसे प्रस्तुत करने मेँ थोड़ी देरी हो गई है| पितृ दिवस के अवसर पर, मैं अपने पूज्य पिताजी का स्मरण करते हुए इस पोस्ट को शेयर कर रहा हूँ, जिनके पास उपलब्धियों के नाम पर कुछ बताने लायक नहीं … Read more

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