मुझ पे लटें बिखराए!

हम सबके प्यारे मुकेश जी और सुमन कल्याणपुर जी का गाया एक बहुत सुंदर युगल गीत आज शेयर कर रहा हूँ| मुकेश जी ने अनेक बहुत प्यारे गीत लता जी के साथ गए थे, जो उनको अपना बड़ा भाई मानती थीं, वहीं सुमन कल्याणपुर जी के साथ भी मुकेश जी ने कुछ बहुत प्यारे गीत … Read more

बहारो थाम लो अब दिल!

आज फिर से एक बार मैं एक युगल गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे लता मंगेशकर जी और मुकेश जी ने गाया है| फिल्म – ‘नमस्ते जी’ के लिए यह गीत लिखा था अंजान साहब ने और इसका संगीत दिया था जी एस. कोहली जी ने| मुकेश जी और लता जी के बहुत से रोमांटिक … Read more

आग पानी में लगाते हुए हालात की रात!

पुराने फिल्मी गीतों को सुनकर यही खयाल आता है कि कितनी मेहनत करते थे गीतकार, संगीतकार और गायक भी उन गीतों की अदायगी में जैसे अपनी आत्मा को उंडेल देते थे| लीजिए आज प्रस्तुत है, 1960 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘बरसात की रात’ के लिए रफ़ी साहब का गाया यह गीत, जिसे लिखा था साहिर … Read more

बदली क्या जाने है पागल, किसी के मन का मोर!

अपने प्रिय गायक मुकेश जी के अमर गाने शेयर करने के क्रम में, आज मैं 1966 में रिलीज़ हुई फिल्म- लाल बंगला का यह गीत शेयर कर रहा हूँ| गीत को लिखा है- इंदीवर जी ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया है- उषा खन्ना जी ने| गीत के बोल पढ़ने पर यही खयाल आता … Read more

क्षण भर को क्यों प्यार किया था?

आज मैं स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, आज की पीढ़ी उनको अमिताभ बच्चन के पिता के रूप में अधिक जानती है, परंतु किसी ज़माने वे हिन्दी कवि सम्मेलनों के अत्यंत लोकप्रिय कवि हुआ करते थे| उनकी ‘मधुशाला’ ने तो लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे, लोग इसको सुनकर … Read more

आज ये आँचल मुँह क्यों छुपाये!

एक बार फिर से मैं आज अपने सर्वाधिक प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक गीत शेयर कर रहा हूँ| मुकेश जी दर्द भरे गीतों के सरताज माने जाते हैं लेकिन रोमांटिक गीत भी उन्होंने एक से एक अच्छे गाये हैं|     आज का यह गीत 1963 में रिलीज़ हुई फिल्म – ‘हॉलिडे इन … Read more

छुप न सकेगा इश्क़ हमारा, चारों तरफ है उनका नज़ारा!

कल एक गीत शेयर किया था, बहुत पुरानी ऐतिहासिक कैरेक्टर्स को लेकर बनाई गई फिल्म से, प्रेम की शक्ति को, प्रेम के हार न मानने वाले जज़्बे को दर्शाने वाला गीत था। असल में जब मुझे वह गीत याद आया तब मुझे जो फिल्म याद आ रही थी, वह थी- मुगल-ए-आज़म, पता नहीं क्यों ध्यान … Read more

कैसे नादान हैं, शोलों को हवा देते हैं!

आज एक बहुत पुरानी फिल्म और उसका एक गीत याद आ रहे हैं। आज का यह गीत है 1963 में रिलीज़ हुई फिल्म- ताज महल का, साहिर लुधियानवी जी के लिखे इस गीत को सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर जी ने रोशन जी के संगीत निर्देशन में अनूठे ढंग से गाया है। कुल मिलाकर इतना है … Read more

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