तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है!

हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है,
दुश्नाम तो नहीं है ये इकराम ही तो है|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

फ़ासला रखना तुझे अपनाना भी!

कितना दुश्वार था दुनिया ये हुनर आना भी,
तुझ से ही फ़ासला रखना तुझे अपनाना भी|

वसीम बरेलवी

सीने पे सो जाओ किसी दिन!

मैं अपनी हर इक साँस उसी रात को दे दूँ,
सर रख के मिरे सीने पे सो जाओ किसी दिन|

अमजद इस्लाम अमजद