मुमकिन है ख़राबों में मिलें

ढूँढ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती,
ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें|

अहमद फ़राज़

वफ़ा कम है तेरे शहर वालों में!

सौ ख़ुलूस बातों में सब करम ख़यालों में,
बस ज़रा वफ़ा कम है तेरे शहर वालों में|

बशीर बद्र

जो न बिके मूरख कहलाए!

तड़क-भड़क संतो की ऐसी,
दुनियादार देख शरमाए ।

जो बिक जाता धन्य वही है,
जो न बिके मूरख कहलाए ।

बालस्वरूप राही

वफ़ा का नाम यहाँ!

वफ़ा का नाम यहाँ हो चुका बहुत बदनाम,
मैं बेवफा हूँ मुझे ऐतराफ है, जानी|

राहत इन्दौरी

ये कलाम किसका था!

वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे,
तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किसका था|

दाग़ देहलवी

क्या मैं बेवफ़ा हो जाऊँगा!

सारी दुनिया की नज़र में है मेरा अहद-ए-वफ़ा,
इक तेरे कहने से क्या मैं बेवफ़ा हो जाऊँगा |

वसीम बरेलवी