ये मुरादों की हसीं रात!

आज साहिर लुधियानवी जी का लिखा एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जो 1964 में रिलीज हुई फिल्म- ग़ज़ल से है, जिसके नायक सुनील दत्त जी थे| हम जानते हैं कि विवाह के अवसर पर सेहरा गाया जाता है, खुशी का मौका होने के कारण और भी बहुत से गीत गाए जाते हैं, लेकिन हमारी फिल्मों में एक बात और होती है, जब नायक की शादी नायिका से नहीं हो पाती, तब वह भी इस अवसर पर अपना दुखड़ा गाता है| मैंने ऐसा कभी नायिका को करते नहीं देखा है|

खैर आज प्रस्तुत है मदन मोहन जी के संगीत निर्देशन में मोहम्मद रफ़ी साहब के मधुर स्वर में, सुनील दत्त जी पर फिल्माया गया, साहिर लुधियानवी जी का लिखा यह गीत, –

रंग और नूर की बारात किसे पेश करूँ,
ये मुरादों की हंसीं रात किसे पेश करूँ, किसे पेश करूँ|


मैने जज़बात निभाए हैं उसूलों की जगह,
अपने अरमान पिरो लाया हूँ फूलों की जगह,
तेरे सेहरे की ये सौगात किसे पेश करूँ,
ये मुरादों की हसीं रात किसे पेश करूँ, किसे पेश करूँ|


ये मेरे शेर मेरे आखिरी नज़राने हैं,
मैं उन अपनों मैं हूँ जो आज से बेगाने हैं,
बेत-आ-लुख़ सी मुलाकात किसे पेश करूँ,
ये मुरादों की हंसीं रात किसे पेश करूँ, किसे पेश करूँ|


सुर्ख जोड़े की तबोताब मुबारक हो तुझे,
तेरी आँखों का नया ख़्वाब मुबारक हो तुझे,
ये मेरी ख़्वाहिश ये ख़यालात किसे पेश करूँ,
ये मुरादों की हंसीं रात किसे पेश करूँ, किसे पेश करूँ|


कौन कहता है चाहत पे सभी का हक़ है,
तू जिसे चाहे तेरा प्यार उसी का हक़ है,
मुझसे कह दे मैं तेरा हाथ किसे पेश करूँ,
ये मुरादों की हंसीं रात किसे पेश करूँ, किसे पेश करूँ|

रंग और नूर की…

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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लो चांद निकल आया!

आज एक गीत फिल्म ‘एक बार मुस्कुरा दो’ से, हमारे प्रिय गायक मुकेश जी और आशा भौंसले जी के मधुर युगल स्वरों में, इसका संगीत तैयार किया है ओ. पी.नैयर जी ने और गीत लिखा था एस एच बिहारी जी ने| आशा जी और मुकेश जी का यह रोमांटिक युगल गीत आज भी हमारे मन में गूंजता रहता है|

लीजिए प्रस्तुत हैं फिल्म- ‘एक बार मुस्कुरा दो’ के लिए आशा जी और मुकेश जी द्वारा गाये गए इस मधुर गीत के बोल :


चेहरे से ज़रा आंचल
जब आपने सरकाया,
दुनिया ये पुकार उठी,
लो चांद निकल आया|

माना के वो हीरा हो,
मुश्किल से जो हाथ आये,
इतना भी ना तड़पाओ,
के जान निकल जाये|

छोड़ो जी ना ये झगड़े,
एक बार मुस्कुरा दो,
तकदीर है क्या अपनी,
मैंने जो तुम्हें पाया|


वैसे तो मुझे तुम पर
पूरा ही भरोसा है,
कैसे वो भुला दूं मैं
जो आँखों ने देखा है|

छेड़ोगे, दिल तोड़ोगे,
एक बार मुस्कुरा दो
इतनी सी शिकायत पर,
कितना मुझे तड़पाया|

दुनिया ये पुकार उठी,
लो चांद निकल आया|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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मुश्किल इस नादान को समझाना होता है!

आज एक गीत 1971 की फिल्म ‘स्वीटहार्ट’ से, हमारे प्रिय गायक मुकेश जी के मधुर स्वर में, इसका संगीत तैयार किया है कल्याणजी आनंदजी की संगीतमय जोड़ी ने और गीत लिखा था आनंद बख्शी जी ने| मुझे यह गीत विशेष रूप से प्रिय है और इसमें लेखन, संगीत और अदायगी सभी लाजवाब हैं

लीजिए प्रस्तुत हैं फिल्म- ‘स्वीटहार्ट’ के इस मधुर गीत के बोल :


कोई कोई आदमी दीवाना होता है,
मुश्किल इस नादान को समझाना होता है|

दिल की बेज़ुबानियां कुछ और होती हैं,
आँखों में कहानियां कुछ और होती हैं,
होंठों पे कुछ और ही अफसाना होता है|
कोई कोई आदमी दीवाना होता है|

तूफाँ क्या होता है, साहिल किसको कहते हैं,
तनहाई क्या है और मंज़िल किसको कहते हैं,
वो इन सारी बातों से बेगाना होता है|
कोई कोई आदमी दीवाना होता है|

ऐसे इंसां की किस्मत में प्यार नहीं होता,
दिल ही उसके सीने में दिलदार नहीं होता,
टूटा सा एक शीशे का पैमाना होता है|

कोई कोई आदमी दीवाना होता है,
मुश्किल इस नादान को समझाना होता है|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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सर न कांधे से सहेली के उठाया होगा!

आज जिस गीत के बोल शेयर कर रहा हूँ, वह युद्ध की पृष्ठभूमि में बनी प्रसिद्ध फिल्म- ‘हक़ीक़त’ से है और इसको चार श्रेष्ठ पुरुष गायकों- मोहम्मद रफ़ी साहब, मन्ना डे साहब, भूपेन्द्र जी और तलत महमूद जी ने बड़े खूबसूरत अन्दाज़ में गाया है| कैफ़ी आज़मी साहब का लिखा यह गीत, अपने बोलों, श्रेष्ठ अदायगी, मदन मोहन जी के लाजवाब संगीत और मोर्चे पर फौजी जवान बने कलाकारों द्वारा अदायगी के कारण एक धरोहर की तरह है|

लीजिए प्रस्तुत हैं फिल्म- ‘हक़ीक़त’ के इस यादगार गीत के बोल :


होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा,
ज़हर चुपके से दवा जानके खाया होगा|
होके मजबूर मुझे …

दिल ने ऐसे भी कुछ अफ़साने सुनाए होंगे,
अश्क़ आँखों ने पिये और न बहाए होंगे,
बन्द कमरे में जो खत मेरे जलाए होंगे,
एक इक हर्फ़ जबीं पर उभर आया होगा|

उसने घबराके नज़र लाख बचाई होगी,
दिल की लुटती हुई दुनिया नज़र आई होगी,
मेज से जब मेरी तस्वीर हटाई होगी,
हर तरफ़ मुझको तड़पता हुआ पाया होगा|
होके मजबूर मुझे …

छेड़ की बात पे अरमाँ मचल आए होंगे,
ग़म दिखावे की हँसी ने न छुपाए होंगे,
नाम पर मेरे जब आँसू निकल आए होंगे,
सर न कांधे से सहेली के उठाया होगा|

ज़ुल्फ़ ज़िद करके किसी ने जो बनाई होगी,
और भी ग़म की घटा मुखड़े पे छाई होगी,
बिजली नज़रों ने कई दिन न गिराई होगी,
रंग चेहरे पे कई रोज़ न आया होगा|
होके मजबूर मुझे …

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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प्यासी है ज़िंदगी और मुझे प्यार दो!

आज फिर से मैं, मुकेश जी और लता मंगेशकर जी के गाये एक युगल गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ, यह गीत फिल्म ‘फिल्म-होली आई रे’ के लिए लिखा था क़मर जलालाबादी साहब ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया था कल्याणजी-आनंदजी की प्रसिद्ध जोड़ी ने|

लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी और लता जी के स्वर में, हमारी स्मृतियों में बसा यह मधुर गीत:

मुकेश- मेरी तमन्नाओं की तक़दीर तुम सँवार दो
प्यासी है ज़िंदगी और मुझे प्यार दो|

नील गगन मण्डप है सारा जग बराती
मन के फेरे सच्चे, सच्चे हैं हम साथी
लाज का ये घूँघट पट आज तो उतार दो
प्यासी है ज़िंदगी …

धरती करवट बदले, बदले हर मौसम
प्रीत के पुजारी हैं बदलेंगे नहीं हम
पतझड़ सा जीवन है, प्यार की बहार दो
प्यासी है ज़िंदगी …


लता- मेरी तमन्नाओं की तकदीर तुम सँवार दो
प्यासी है ज़िन्दगी तुम मुझे प्यार दो|

प्यार का अकाल पड़ा सारे ही जग में
धोखे हुए हर दिल में, नफ़रत है रग-रग में
सबने डुबोया है मुझे, पार तुम उतार दो|

खुशी यहाँ थोड़ी सी और बहुत ग़म हैं
जितना भी प्यार मिले, उतना ही कम है
ग़म से भरे जीवन को प्यार से निखार दो|
प्यासी है ज़िन्दगी तुम मुझे प्यार दो|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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जाने न नज़र पहचाने जिगर!

एक बार फिर से मैं, हम सबके प्रिय गायक मुकेश जी और लता मंगेशकर जी के गाये एक युगल गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ, यह गीत राज कपूर साहब की फिल्म ‘आह’ के लिए लिखा था हसरत जयपुरी जी ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया था शंकर-जयकिशन की प्रसिद्ध जोड़ी ने|

लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी और लता जी के स्वर में, राज कपूर साहब की फिल्म- ‘आह’ का हमारे मन में बसा हुआ यह रोमांटिक गीत:


जाने न नज़र पहचाने जिगर
ये कौन जो दिल पर छाया
मेरा अंग अंग मुस्काया|

आवाज़ ये किसकी आती है
जो छेड़ के दिल को जाती है|
मैं सुन के जिसे शर्मा जाऊँ
है कौन जो दिल में समाया
मेरा अंग अंग मुस्काया|

जाने न नज़र पहचाने जिगर
ये कौन जो दिल पर छाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया|

ढूँढेंगे उसे हम तारों में
सावन की ठण्डी बहारों में,
पर हम भी किसी से कम तो नहीं
क्यों रूप को अपने छुपाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया|

बिन देखे जिसको प्यार करूँ
गर देखूँ उसको जान भी दूँ|
एक बार कहो ओ जादूगर
ये कौन सा खेल रचाया
मेरा अंग अंग मुस्काया|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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तुम्हारी मस्त नज़र!

आज मैं पुरानी फिल्म- ‘दिल ही तो है’ का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| इस फिल्म के नायक राज कपूर थे और उनकी नायिका नूतन थीं| इस फिल्म के लिए मुकेश जी ने ये प्यारा सा गीत गाया था|

आज का यह गीत साहिर लुधियानवी जी का लिखा हुआ है और इसे रोशन जी के संगीत निर्देशन में मुकेश जी ने बड़े मस्ती भरे अन्दाज़ में गाया था|

लीजिए प्रस्तुत हैं इस गीत के बोल –


तुम्हारी मस्त नज़र, गर इधर नहीं होती,
नशे में चूर फ़िज़ा इस क़दर नहीं होती|

तुम्हीं को देखने की दिल में आरज़ूएं हैं,
तुम्हारे आगे ही और ऊँची नज़र नहीं होती|

ख़फ़ा न होना अगर बढ़ के थाम लूँ दामन,
ये दिल फ़रेब ख़ता जान कर नहीं होती|

तुम्हारे आने तलक हम को होश रहता है,
फिर उसके बाद हमें कुछ खबर नहीं होती|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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बस यही एक पल है!


आज मैं 1965 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘वक़्त’ का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| फिल्मी गीतों में सभी प्रकार के दर्शन, हर प्रकार के विचारों, फलसफ़ों को अभिव्यक्ति दी जाती है, जैसे जो पार्टी एनिमल कहे जाते हैं, विलन और वेंप होते हैं, उनका अलग फलसफ़ा होता है| ऐसा ही फलसफ़ा इस गीत में व्यक्त किया गया है|

आज का यह गीत साहिर लुधियानवी जी का लिखा हुआ है और इसे रवि जी के संगीत निर्देशन में आशा भोंसले जी और समूह ने गाया था| लीजिए प्रस्तुत हैं इस गीत के बोल –

आगे भी जाने ना तू, पीछे भी जाने ना तू
जो भी है बस यही एक पल है|

अनजाने सायों का राहों में डेरा है
अनदेखी बाहों ने हम सब को घेरा है,
ये पल उजाला है, बाकी अँधेरा है
ये पल गँवाना ना, ये पल ही तेरा है,
जीने वाले सोच ले
यही वक़्त है कर ले पूरी आरज़ू|

इस पल के जलवों ने महफ़िल सँवारी है
इस पल की गर्मी ने धड़कन उभारी है,
इस पल के होने से दुनिया हमारी है
ये पल जो देखो तो सदियों पे भारी है,
जीने वाले सोच ले
यही वक़्त है कर ले पूरी आरज़ू|

इस पल के साये में अपना ठिकाना है
इस पल के आगे की हर शय फ़साना है,
कल किसने देखा है, कल किसने जाना है
इस पल से पाएगा, जो तुझको पाना है,
जीने वाले सोच ले
यही वक़्त है कर ले पूरी आरज़ू|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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रुला के गया, सपना मेरा!



कल मैंने भारतीय सिनेमा जगत के दो महान व्यक्तित्वों – राज कपूर जी को उनके जन्म दिन पर और उनके साथी और महान जनकवि शैलेन्द्र जी को उनकी पुण्य तिथि पर याद किया था|

कल मैंने राज साहब की फिल्म – ‘मेरा नाम जोकर’ का एक गीत भी उनकी स्मृति में शेयर किया था| आज मैं शैलेन्द्र जी का लिखा एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जो उन्होंने देव आनंद जी की फिल्म ‘ज्वेल थीफ’ के लिए लिखा था और इसे सचिन देव बर्मन जी के संगीत निर्देशन में लता मंगेशकर जी ने गाया था| लीजिए प्रस्तुत हैं इस गीत के बोल –


रुला के गया, सपना मेरा
बैठी हूँ कब हो सवेरा
रुला के गया, सपना मेरा
बैठी हूँ कब हो सवेरा|

वही है गम-ए-दिल, वही हैं चन्दा तारे
वही हम बेसहारे
आधी रात वही हैं, और हर बात वही हैं
फिर भी ना आया लुटेरा|

रुला के गया, सपना मेरा
बैठी हूँ कब हो सवेरा|

कैसी ये जिन्दगी, के साँसों से हम ऊबे
के दिल डूबा, हम डूबे
एक दुखिया बेचारी, इस जीवन से हारी
उस पर ये गम का अन्धेरा|

रुला के गया, सपना मेरा
बैठी हूँ कब हो सवेरा|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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कहता है जोकर!


कल भारतीय सिनेमा जगत के ‘सपनों के सौदागर’ राज कपूर जी का जन्म दिन था और उनके साथी और महान जनकवि शैलेन्द्र जी की पुण्य तिथि भी थी| एक दिन देर से ही सही मैं उन दोनों महान हस्तियों का पुण्य स्मरण करता हूँ|

शैलेन्द्र जी को ‘तीसरी कसम’ बनाने की उनकी धुन ले बैठी थी और राज कपूर साहब भी अपने ड्रीम प्रोजेक्ट ‘मेरा नाम जोकर’ की असफलता के बाद बरबाद हो गए थे| उन्होंने अपनी पूरी पूंजी इस फिल्म पर लगा दी थी और उस समय यह फिल्म नहीं चल पाई थी|

मैंने कहीं पढ़ा था कि इस फिल्म की असफलता के बाद राज कपूर नशे की हालत में ख्वाजा अहमद अब्बास जी के पास गए और कहा कि ‘मुझे अब आप ही बचा सकते हो’| अब्बास साहब ने तब ‘बॉबी’ की स्क्रिप्ट लिखकर दी, इस फिल्म में राज कपूर के दोस्त रहे ‘प्राण’ जी ने एक रुपये में काम करना स्वीकार कर लिया और कहा कि अगर अच्छी कमाई हो जाए तो मुझे मेरी फीस दे देना| इसमें एक बड़ी भूमिका राज कपूर के साले प्रेम नाथ जी ने की और हीरो के लिए राजेश खन्ना जैसे स्टार को लेने की स्थिति में राज कपूर नहीं थे, इसलिए उन्होंने अपने बेटे ऋषि कपूर को यह रोल दिया और नई नवेली नायिका डिंपल कपाड़िया को इस फिल्म में लांच किया|

इस फिल्म ने रिकॉर्ड तोड़ सफलता प्राप्त की और राज कपूर फिर से समृद्ध हो गए| लेकिन इस फिल्म के बाद राज कपूर ने प्राण जी को एक लाख का चेक भेजा, जिस पर प्राण नाराज हो गए क्योंकि वे तब इससे कहीं अधिक फीस लेते थे, और इसके बाद उनकी दोस्ती भी टूट गई थी|

खैर लीजिए प्रस्तुत है ‘मेरा नाम जोकर’ फिल्म के लिए नीरज जी का लिखा यह गीत जिसे शंकर जयकीशन की जोड़ी के मधुर संगीत में मेरे प्रिय गायक मुकेश जी ने गाया था –

कहता है जोकर सारा ज़माना
आधी हक़ीकत आधा फ़साना
चश्मा उतारो, फिर देखो यारो
दुनिया नयी है, चेहरा पुराना
कहता है जोकर …

धक्के पे धक्का, रेले पे रेला
है भीड़ इतनी पर दिल अकेला
ग़म जब सताये, सीटी बजाना
पर मसखरे से दिल न लगाना
कहता है जोकर …

अपने पे हँस के जग को हँसाया
बन के तमाशा मेले में आया
हिन्दु न मुस्लिम, पूरब न पश्चिम
मज़हब है अपना हँसना हँसाना
कहता है जोकर …


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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