हम जान हार गुज़रे!

तूने भी हमको देखा, हमने भी तुझको देखा,
तू दिल ही हार गुज़रा हम जान हार गुज़रे।

मीना कुमारी

कोई तो पार गुज़रे!

बहती हुई ये नदिया घुलते हुए किनारे,
कोई तो पार उतरे कोई तो पार गुज़रे|

मीना कुमारी

एक दिन बहार गुज़रे!

बैठे हैं रास्ते में दिल का खंडहर सजाकर,
शायद इसी तरफ़ से एक दिन बहार गुज़रे|

मीना कुमारी

कोई कोहराम नहीं होता!

दिन डूबे हैं या डूबे बारात लिये कश्ती,
साहिल पे मगर कोई कोहराम नहीं होता|

मीना कुमारी

किस्मत में ईनाम नहीं होता!

हँस- हँस के जवां दिल के, हम क्यों न चुनें टुकडे़,
हर शख्स़ की किस्मत में ईनाम नहीं होता|

मीना कुमारी

लेकिन गुमनाम नहीं हॊता!

जब ज़ुल्फ़ की कालिख़ में घुल जाए कोई राही,
बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं हॊता|

मीना कुमारी

सिमटा-सा एक मकां तन्हा!

जलती-बुझती-सी रोशनी के परे,
सिमटा-सिमटा-सा एक मकां तन्हा|

मीना कुमारी (महज़बीं बानो)

चलते रहें कहां तन्हा!

हमसफ़र कोई गर मिले भी कभी,
दोनों चलते रहें कहां तन्हा|

मीना कुमारी (महज़बीं बानो)

और जां तन्हा!

ज़िन्दगी क्या इसी को कहते हैं,
जिस्म तन्हा है और जां तन्हा|

मीना कुमारी (महज़बीं बानो)