मिल जाना क्या, न मिलना क्या!

उसका मिल जाना क्या, न मिलना क्या
ख्वाब-दर-ख्वाब कुछ मज़ा ही नहीं।

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

आरज़ू थी मुलाक़ात की!

न जी भर के देखा न कुछ बात की,
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की|

बशीर बद्र

याद आए तो दिल मुनव्वर हो!

याद आए तो दिल मुनव्वर हो,
दीद हो जाए तो नज़र महके|

डॉ. नवाज़ देवबंदी

मुझको भी रुलाना याद है!

आ गया गर वस्ल की शब भी कहीं ज़िक्रे-फ़िराक़,
वो तेरा रो-रो के मुझको भी रुलाना याद है|

हसरत मो
हानी

तू सोया न था!

आज मिलने की ख़ुशी में सिर्फ़ मैं जागा नहीं,
तेरी आँखों से भी लगता है कि तू सोया न था|

अदीम हाशमी

मिलना बहुत जरूरी है!

हमने देखा है बिछुड़ों को
मिलना बहुत जरूरी है।
उतने ही हम पास रहेंगे,
जितनी हममें दूरी है।

डॉ. कुंवर बेचैन