मुलाक़ात की कोशिश नहीं की!

वो हमें भूल गया हो तो अजब क्या है ‘फ़राज़’,
हम ने भी मेल-मुलाक़ात की कोशिश नहीं की|

अहमद फ़रा

मिल के बिछड़ना ज़रूर था!

दुनिया है ये किसी का न इसमें क़ुसूर था,
दो दोस्तों का मिल के बिछड़ना ज़रूर था|

आनंद नारायण मुल्ला

हमारी तुम्हारी मुलाक़ात होगी!

जहाँ वादियों में नए फूल आए,
हमारी तुम्हारी मुलाक़ात होगी|

बशीर बद्र

आदमी आदमी से मिलता है!

आदमी आदमी से मिलता है,
दिल मगर कम किसी से मिलता है|

जिगर मुरादाबादी

वक़्त का एहसास नहीं रहता है!

रोज़ मिलने पे भी लगता था कि जुग बीत गए,
इश्क़ में वक़्त का एहसास नहीं रहता है|

अहमद मुश्ताक़

फलाने से फलाने से मिले!

हम तरसते ही तरसते ही तरसते ही रहे,
वो फलाने से फलाने से फलाने से मिले|

कैफ़ भोपाली