घर तो रखवारों ने लूटा!

हिंदी कविता की जो श्रवण परंपरा रही है, कवि सम्मेलनों के माध्यम से लोगों तक पहुंचने की, उसमें बहुत से लोकप्रिय कवि रहे हैं और उन्होंने हिंदी कविता कोश को बहुत समृद्ध किया है। यह अलग बात है कि बाद में कवि सम्मेलन के मंच चुटकुलेबाजी को ज्यादा समर्पित हो गए, हालांकि आज भी कुछ … Read more

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