’नक़्श’ ने फिर न आइना देखा!

जाने चेहरे पे क्या नज़र आया,
’नक़्श’ ने फिर न आइना देखा।

नक़्श लायलपुरी

नहीं अक्स कोई भी मुस्तक़िल!

ये जो रात दिन का है खेल सा, उसे देख इसपे यकीं न कर,
नहीं अक्स कोई भी मुस्तक़िल सरे-आईना उसे भूल जा।

अमजद इस्लाम

आग का दरिया मुझे!

उसको आईना बनाया, धूप का चेहरा मुझे,
रास्ता फूलों का सबको, आग का दरिया मुझे|

बशीर बद्र

न देखा करें आईना कभी!

आप लिल्लाह न देखा करें आईना कभी,
दिल का आ जाना बड़ी बात नहीं होती है|

शकील बदायूँनी

देखभाल के चल!

ये लफ़्ज़ आईने हैं मत इन्हें उछाल के चल,
अदब की राह मिली है तो देखभाल के चल।

कुँअर बेचैन

मैं तोड़ फोड़ दूंगा उसे!

बदन चुरा के वो चलता है मुझसे शीशा-बदन,
उसे ये डर है कि मैं तोड़ फोड़ दूंगा उसे|

राहत इन्दौरी

आपका इक सौदाई भी!

दो दो शक़्लें दिखती हैं इस बहके से आईने में,
मेरे साथ चला आया है आपका इक सौदाई भी|

गुलज़ार

उलझता है जब भी हमारा अक्स!

आईने से उलझता है जब भी हमारा अक्स,
हट जाते हैं बचा के नज़र दरमियाँ से हम|

राजेश रेड्डी