झूठ बोलता ही नहीं

जड़ दो चांदी में चाहे सोने में,
आईना झूठ बोलता ही नहीं।

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

देखा नहीं आईने से आगे कुछ भी!

तूने देखा नहीं आईने से आगे कुछ भी,
ख़ुदपरस्ती में कहीं तू न गँवा ले मुझको|

क़तील शिफ़ाई

आईना अभिशाप है सूने मकान में!

तस्वीर के लिये भी कोई रूप चाहिये,
ये आईना अभिशाप है सूने मकान में।

उदय प्रताप सिंह

घर में आईना भी है?

जवाब दे ना सका, और बन गया दुश्मन,
सवाल था, के तेरे घर में आईना भी है?

राहत इन्दौरी

आईने से घबराओगे!

तनहाई के झूले झूलोगे, हर बात पुरानी भूलोगे
आईने से घबराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जायेगा

सईद राही