अपनी कहो अब तुम कैसे हो!

हमसे न पूछो हिज्र के क़िस्से,
अपनी कहो अब तुम कैसे हो|

मोहसिन नक़वी

फिर भी कितने दूर खड़े हो!

कहने को रहते हो दिल में,
फिर भी कितने दूर खड़े हो|

मोहसिन नक़वी

मेरी ख़ातिर क्यूँ उलझे हो!

अपने शहर के सब लोगों से,
मेरी ख़ातिर क्यूँ उलझे हो|

मोहसिन नक़वी

में झूठा हूँ तुम सच्चे हो!

जाओ जीत का जश्न मनाओ,
में झूठा हूँ तुम सच्चे हो|

मोहसिन नक़वी

इतने अच्छे क्यूँ लगते हो!

कौन सी बात है तुम में ऐसी,
इतने अच्छे क्यूँ लगते हो|

मोहसिन नक़वी