कुछ ने कहा चेहरा तेरा!

कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा,
कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तेरा |

इब्न ए इंशा

ज़मीं से चाँद बहुत दूर हो गया!

महलों में हमने कितने सितारे सजा दिए,
लेकिन ज़मीं से चाँद बहुत दूर हो गया|

बशीर ब
द्र

रौनक़ से मैं अब ऊब रहा हूँ!

दुनिया तिरी रौनक़ से मैं अब ऊब रहा हूँ,
तू चाँद मुझे कहती थी मैं डूब रहा हूँ|

मुनव्वर राना

सर पे अब चढ़ता जा रहा है चाँद!

सीधा-सादा उफ़ुक़ से निकला था,
सर पे अब चढ़ता जा रहा है चाँद|

गुलज़ार

झेंपा झेंपा सा आ रहा है चाँद!

जाने किसकी गली से निकला है,
झेंपा झेंपा सा आ रहा है चाँद|

गुलज़ार

कोई साज़िश छुपा रहा है चाँद!

बे-सबब मुस्कुरा रहा है चाँद,
कोई साज़िश छुपा रहा है चाँद|

गुलज़ार

चिड़ियों को आज़ाद किया!

खोल के खिड़की चाँद हँसा फिर चाँद ने दोनों हाथों से,
रंग उड़ाए फूल खिलाए चिड़ियों को आज़ाद किया|

निदा फ़ाज़ली

बुझने दो उनको हवा तो चले!

चाँद सूरज बुज़ुर्गों के नक़्श-ए-क़दम,
ख़ैर बुझने दो उनको हवा तो चले|

कैफ़ी आज़मी

दस्त-ए-साक़ी में आफ़्ताब आए!

बाम-ए-मीना से माहताब उतरे,
दस्त-ए-साक़ी में आफ़्ताब आए|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़