झूमर तेरे माथे पे हिला करता है!

रात यों चाँद को देखा है नदी में रक्साँ,
जैसे झूमर तेरे माथे पे हिला करता है|

क़तील शिफ़ाई

तेरे साहिलों पे खिला था जो!

तुझे चाँद बन के मिला था जो, तेरे साहिलों पे खिला था जो,
वो था एक दरिया विसाल का, सो उतर गया उसे भूल जा।

अमजद इस्लाम

अब तक डरी नहीं है दुनिया!

भाग रही है गेंद के पीछे
जाग रही है चाँद के नीचे,
शोर भरे काले नारों से
अब तक डरी नहीं है दुनिया

निदा फ़ाज़ली

तारों से झाँकता है मुझे!

रात तनहाइयों के आंगन में,
चांद तारों से झाँकता है मुझे|

बेकल उत्साही

कितनी देर लगा दी आने में!

शाम के साये बालिस्तों से नापे हैं,
चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में|

गुलज़ार

ज़रा हाथ बढाकर देखो!

फ़ासला नज़रों का धोखा भी तो हो सकता है,
चाँद जब चमके ज़रा हाथ बढाकर देखो |

निदा फ़ाज़ली

तस्वीर-सी महताब में आ जाती है!

रात भर जागते रहने का सिला है शायद,
तेरी तस्वीर-सी महताब में आ जाती है|

मुनव्वर राना

उसे आसमान में रखना!

वो ख्वाब जो चेहरा कभी नहीं बनता,
बना के चाँद उसे आसमान में रखना |

निदा फ़ाज़ली

मुँह मत लगाया करो!

चांद सूरज कहाँ, अपनी मंज़िल कहाँ,
ऐसे वैसों को मुँह मत लगाया करो|

राहत इन्दौरी