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फिर सुशांत की बात!

आज एक बार फिर से सुशांत सिंह राजपूत के बारे में बात करने का मन हो रहा है| सुशांत की मौत को दो महीने से ज्यादा समय बीत चुका है और समय बीतने के साथ यह तो स्पष्ट होता जा रहा है कि सुशांत जी ने आत्महत्या तो नहीं ही की है| कौन लोग थे इस हत्या के पीछे, उसके लिए तो सीबीआई इस मामले को देखेगी, क्योंकि मुंबई पुलिस के रुख से ऐसा बिलकुल नहीं लगता कि वे सच्चाई का पता लगाना चाहते हैं| अब ऐसा क्यों है, यह तो सही जांच होने पर ही पता चल पाएगा|


कौन इस घटना के दोषी हैं, इस बारे में तो मेरे पास कहने को कुछ नहीं है, क्योंकि मेरी ऐसी खोजी प्रवृत्ति नहीं है| मैं तो सुशांत सिंह राजपूत के बारे में ही कुछ बात करना चाहता हूँ| मुंबई फिल्म नगरी की दुनिया ही ग्लैमर की दुनिया है| बहुत समय से यहाँ बाहर वालों का प्रवेश काफी कठिन होता गया है| फिर जो लोग प्रवेश कर पाते हैं और हीरो बनने जैसी स्थिति में भी पहुँच पाते हैं, उनको यहाँ पहले से जमे हुए लोगों, उनके शक्तिशाली समूह से बनाकर रखनी पड़ती है, उनकी हाँ में हाँ मिलानी पड़ती है और ऐसा भी कहा जाता है कि वहाँ माफिया की शरण में रहना पड़ता है|


हम, फिल्मी कलाकारों के जीवन काल में उनके ग्लैमर, उनकी सफल भूमिकाओं और वे अपने साक्षात्कारों आदि में जो कुछ अपने बारे में बताते हैं, वही जानते हैं| सुशांत सिंह राजपूत की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु के बाद उनके बारे में अनेक बातें मालूम हुईं, जो उनकी फिल्मी भूमिकाओं से अलग हैं|


यह तो हम जानते हैं कि फिल्मी दुनिया में लोग पढ़ाई में कमाल करने वाले बहुत कम होते हैं| किसी जमाने में बलराज साहनी जैसे कुछ पढे-लिखे लोग थे| आज के समय में जो कुछ पढे-लिखे लोग फिल्मों में रहे हैं उनमें सुशांत सिंह राजपूत एक हैं, इतना ही नहीं वे टॉपर भी रहे, उन्होंने एक विशेष दूरबीन भी ली हुई थी, जिससे वे नक्षत्रों को देखते थे| बाकायदा योजना बनाकर वे निरंतर आगे बढ़ रहे थे| वे बहुत उदार और आस्थावान भी थे, बहुत से लोगों की उन्होंने ऐसी मदद की जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती| उनकी लिव-इन पार्टनर ने भी उनका भरपूर फायदा उठाया और उनके पैसे से बनी कंपनी में अपने परिवार को सारे अधिकार सौंप दिए और उनके खर्च पर पर दुनिया घूम ली|


ऐसी अनेक बातें सुशांत जी की मृत्यु के बाद पता चल रही हैं कि वे कितने उदार, खुशदिल और आस्थावान मनुष्य थे| यह सब जानने के बाद हर किसी की यह और भी इच्छा है कि इस मामले के दोषियों को कड़ी सज़ा दी जाए और यदि वहाँ कोई दुष्ट माफिया काम कर रहा है, जो प्रतिभाशाली लोगों के विरुद्ध काम करता है तो उसको जड़ से उखाड़ फेंका जाए|


आज एक बार फिर उस प्रतिभाशाली कलाकार और एक उम्दा इंसान का आदरपूर्वक स्मरण करने का मन हो रहा है, काश ऐसी प्रतिभा के अंत के पीछे जो लोग हैं उन्हें ऐसा दंड मिले कि वे फिर से किसी प्रतिभा का गला नहीं घोट पाएँ|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|

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Utilising Lockout time!

Today I would write about my experience and routine activity during Lockout. I have been a retired person for last 10 years. Before that I worked near Lucknow. After retirement I shifted to Gurgaon, lived there for around 5 years and then shifted to Gurgaon.

 

 

I have been mostly living at home for last 10 years, except going for evening walk for an hour and sometimes going for an outing or family visit. So Lockout has not made a great difference in my routine. One more thing my second son lives in Bangalore and we came here on visit with a plan to stay for almost 2 months, however when we were about to return to Goa, this period of Lockout started and all flights also were cancelled and it then depended solely on end of lockout that we could think of going back.

Again as I said before for me, as a person living retired life for last 10 years, this lockout does not make much difference. Yes for those working from home now, like my son it has made a great difference. Further I could also move out anytime I wanted for short visits outside from my 17th floor residence, come to ground level, which I have not done till now after the lockout, might be it is more than required under these conditions, evening walk also discontinued.

Yes the main activity I get involved has been blogging and surfing the net, I also do work on some translation assignments, but during this period I have not received any such assignment also. I write blog posts and try to read blog posts written by fellow bloggers and on TV have been mostly watching news and debates, which include the debates conducted by Arnab Goswami, Amish Devgan and the one by Rohit Sardana. I still watch these to some extent but during this special period I have been watching some special programs with family.

Besides watching some nice movies, which included Oscar award winning first South Korean movie- ‘ Parasite. Other than that A TV serial which was telecast long back, we are watching now a days. That Hindi serial is ‘Devon ke dev Mahadev’. We have viewed 3 seasons of this serial, very long and interesting mythological serial. We are enjoying it a lot. Till now ‘Sati’ has ended her life, has born again and now about to meet Mahadev for the first time as Parvati.

Other than the above serial and a few movies, which we watch on Hotstar, YouTube etc. etc. We also watched a serial ‘Special Ops’ regarding secret operations to neutralize terrorist acts of  enemy country, conducted in other countries, it was a very nice serial and gave an insight about how secret mission are conducted.

I may mention two other serials that we had watched earlier but people can watch them during Lockout, one is ‘Out Of Love’ and the other ‘Mirzapur’. The first one is very daring serial regarding breaking of love life and revenge and the other regarding Gangs and Mafias operating in some areas.

This is something I could remember about my activities during Lockout. This is my humble submission on the #IndiSpire prompt – What are you doing in this lockout ? Housework ? Creative activities ? Praying ? #lockout

Thanks for reading.

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चेहरा है जैसे झील मे हँसता हुआ कंवल!

जैसा कि मेरे नियमित पाठक जानते होंगे, मुकेश जी मेरे परम प्रिय गायक हैं, जब मैं फिल्मी गीत शेयर करता हूँ तब सबसे पहले मेरा ध्यान मुकेश जी के गाये हुए गीतों की ओर जाता है, इसका मतलब यह नहीं है कि अन्य गायकों के प्रति मेरा उतना सम्मान नहीं है। ऐसे भी लोग हैं जो जब पुराने गीतों की बात करते हैं तब उनको मुकेश जी का नाम लेने में ही संकोच होता है।

हाँ जी अपनी-अपनी पसंद है। खैर आज मैं रफी साहब का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, मुझे रफी साहब के भी बहुत सारे गीत प्रिय हैं, पहले भी कुछ गीत शेयर किए हैं मैने उनके। आज का यह गीत 1960 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘चौदहवीं का चांद’ से है, शकील बदायुनी जी के लिखे इस गीत को रफी साहब ने रवि जी के संगीत निर्देशन में गाया था।

इस गीत में शकील साहब ने सौंदर्य की बहुत सुंदर उपमायें दी हैं और रफी साहब ने इसे बड़े सुरीले अंदाज़ में गाया है। लीजिए प्रस्तुत है यह अमर प्रेम गीत-

 

 

चौदहवीं का चाँद हो, या आफ़ताब हो,
जो भी हो तुम खुदा की क़सम, लाजवाब हो।
चौदहवीं का चाँद हो।

 

ज़ुल्फ़ें हैं जैसे काँधों पे बादल झुके हुए,
आँखें हैं जैसे मय के पयाले भरे हुए,
मस्ती है जिसमें प्यार की तुम वो शराब हो।
चौदहवीं का चाँद हो।

 

चेहरा है जैसे झील मे हँसता हुआ कंवल,
या ज़िंदगी के साज़ पे छेड़ी हुई गज़ल,
जाने बहार तुम किसी शायर का ख़्वाब हो।
चौदहवीं का चाँद हो।

 

होंठों पे खेलती हैं तबस्सुम की बिजलियाँ,
सज़दे तुम्हारी राह में करती हैं कहकशाँ,
दुनिया-ए-हुस्न-ओ-इश्क़ का तुम ही शबाब हो,
चौदहवीं का चाँद हो, या आफ़ताब हो
जो भी हो तुम खुदा की क़सम, लाजवाब हो।
चौदहवीं का चाँद हो।

 

आज के लिए इतना ही।
नमस्कार।

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सिंगर शबाब साबरी का नया गाना – बेक़रार माही!

Noted for massive hit “Hud Hud Dabang” from film-Dabangg, famous singer Shabab Shabri’s new song will hit the market soon. The first look poster of the next single is out and has gone viral!

The song is titled ‘Beqaraar Maahi’ and it’s been written by noted lyricist Qaseem Haider Qaseem, who will also be seen featuring in the song along with actress Aarti Saxena.

 

Talking about the song, Qaseem Haider Qaseem said that the shooting of the song ‘Beqaraar Maahi’ has been done in different areas of Mumbai. The poster of this song, produced under the banner of BB Entertainment, went viral as soon as it is expected that people will like this song too. Our team has worked very hard on this song which you will see in the video song. Qaseem told that our team will soon launch this song worldwide.

This song is directed by Shadab Siddiqui. Producer is NK Moosvi. The DOP and Editor of the song is Nitish Chandra, Story and Screen Play is by Shadab Siddiqui, Costumes by Roli Chaturvedi, Makeup artist is Satwinder Kalsi, Sound Mixing is by Yoggendra Vaghe, Colourist Nitish Chandra.

 

NK Music Company has given the music with special contribution from Yoggendra Vaghe, who has not only composed the song but also created guitar and mandolin score. Mrinal Das has mixed the song.

दबंग से बड़े हिट “हद हद दबंग” के लिए प्रसिद्ध गायक शबाब साबरी का नया गाना जल्द ही बाजार में आएगा। अगले सिंगल का फर्स्ट लुक पोस्टर रिलीज़ हो गया है और वायरल हो गया है!

इस गीत का शीर्षक ‘बेकरार माही’ है और इसे जाने-माने गीतकार क़सीम हैदर क़सीम ने लिखा है, जिन्हे अभिनेत्री आरती सक्सेना के साथ गाने में भी दिखाया जाएगा।

गाने के बारे में बात करते हुए, क़सीम हैदर क़सीम ने कहा कि गीत  ‘बेकरार माही’ की शूटिंग मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों में की गई है। बीबी एंटरटेनमेंट के बैनर तले निर्मित इस गाने का पोस्टर जैसे  वायरल हुआ है, उम्मीद है कि लोगों को यह गाना भी पसंद आएगा। हमारी टीम ने इस गीत पर बहुत मेहनत की है जो आप वीडियो गीत में देखेंगे। कसीम ने बताया कि हमारी टीम जल्द ही इस गाने को दुनिया भर में लॉन्च करेगी।

इस गाने को शादाब सिद्दीकी ने डायरेक्ट किया है। निर्माता एनके मूसवी हैं। गाने के डीओपी और एडिटर नीतीश चंद्र हैं, शादाब सिद्दीकी की कहानी और स्क्रीन प्ले है, रोली चतुर्वेदी के कॉस्ट्यूम, मेकअप आर्टिस्ट सतविंदर कलसी का है, साउंड मिक्सिंग योगगेंद्र वाघे, कोलॉरिस्ट नीतीश चंद्र की है।

एनके म्यूजिक कंपनी ने योगेन्द्र वाघे के विशेष योगदान के साथ संगीत दिया है, जिन्होंने न केवल गीत तैयार किया है, बल्कि गिटार और मैंडोलिन स्कोर भी बनाया है। मृणाल दास ने गीत की मिक्सिंग की है।

अभी जिस तरह से लोगों ने पोस्टर को देखा और इसे बहुत पसंद किया, गाने के सुपरहिट होने की जबर्दस्त संभावना  है।

यह रिपोर्ट तथा इससे संबंधित चित्र बॉलीवुड एवं मीडिया फोटोग्राफर- श्री कबीर एम. लव  (कबीर अली) द्वारा उपलब्ध कराए गए।

नमस्कार।

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Social media v/s Society!

Today once again I am talking about Social media. While thinking about social media, the first objection that rises in my mind is, how come it is called ‘Social’! Actually it is the thing that has destroyed all social connections in today’s world.

 

I remember the scene of Chaupals in villages, mostly we have seen them in films only, where people gathered and entertained each other with songs, jokes etc. A song from RK film ‘Ramaiya vatta vaiyaa’ comes to my mind suddenly.

Not only that, earlier wherever people met, in train journey, buses or on visiting some office, may be for an interview, before or along with the main activity, they interacted a lot. People were very much interested in knowing about the other person, from where he or she is, how about his family, city or village etc.

The scene of today is that there are several people sitting in a drawing room or say guest room of some office, waiting for their turn, everybody busy on mobile, talking or texting, actually talking also has very much reduced, people mostly text, they mostly write to people whom they have never met and may also not get a chance of meeting in future.

They get connected with people by sharing nice thoughts, quotes of great people or jokes etc. and feel how good that person is, such nice thoughts he or she shares. But in this process they remain so much busy on mobile screen that they do not find time, even to exchange smiles with people who are near them.
There are various facets of social media, making friends with people having similar interests or those working in same field, provided you have time to spend in discussions with them. Mostly friendships are such that people regularly write Good morning, Good evening etc. for that also some people develop nice stickers and all others use them.

I am involved in blogging activities for last 2 years or a little more, I find there a chance to express my feelings, my views on various subjects, people read them, I also read blog posts written by others and there is some interaction also. I feel that this activity is quite good, as long as you keep a safe distance from politics, because once you enter the arena of politics, you may come across some undesirable people also. However that is quite less in blogging activity.

There is a lot that can be said about social media addiction, I would only like to say that like some other activities, social media can be a good slave but not at all a good master. As long as you use social media wisely and keep this activity under your control it is a good, even if for time pass, but once you become addicted to it, you may lose your real dear people and may pick fights also with some people.

One must keep in mind that social media may be an extension of your social activity, as long as you are more social in real life and less in this virtual world, it is good. Once this virtual world over-shadows the real world, it might result in disasters some time.

This is all that came to my mind, while expressing my views on the #IndiSpire prompt- Is social media making people more unsocial? #SocialMedia

Thanks for reading.

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अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव में -‘ताशकंद फाइल्स’

पणजी, गोवा में चल रहे 50 वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 का 28 नवंबर को समापन हो गया। ‘IFFI@50’ में फिल्मों के शौकीन लोगों को अनेक श्रेष्ठ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्में देखने को मिलीं।

 

इसी क्रम की एक कड़ी के रूप में प्रोड्यूसर शरद पटेल की फिल्म ‘ताशकंद फाइल्स’ को इस समारोह में काफी प्रशंसा प्राप्त हुई।

शरद पटेल की इस फिल्म को 50वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव में विशेष प्रदर्शन के लिए आमंत्रित किया गया था। फिल्म का यह प्रदर्शन ‘हाउस फुल’ रहा और दर्शकों ने फिल्म को काफी सराहा। यह फिल्म वर्ष 2019 की सफलतम फिल्मों की श्रेणी में शामिल है।

यह फिल्म अप्रैल 2019 में रिलीज़ हुई थी तथा भारतवर्ष में और विदेशी छविगृहों में यह लगातार 100 दिनों तक प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म को अभी भी, आईएफएआई-2019 के दौरान प्रदर्शित किए जाने पर दर्शकों से बहुत सराहना प्राप्त हुई। श्री शरद पटेल दर्शकों के इस उत्साह को देखकर भावविभोर हो गए और उन्होंने कहा कि अच्छा होता कि फिल्म की पूरी टीम इस अवसर पर उपस्थित होती और इस रिस्पांस का आनंद लेती।

 

 

श्री शरद पटेल एसपी सिनेकॉर्प के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं और उन्होंने कुछ ऐसी फिल्में प्रोड्यूस की हैं जिनको बहुत प्रशंसा प्राप्त हुई है, जैसे ‘बुद्धा इन ट्रैफिक जाम’, और अत्यंत सफल गुजराती फिल्म- ‘छेल्लो दिवस’, वे हाल ही में अपनी नए गुजराती प्रोडक्शन ‘विक्किडा नो वर्घोडो’ के लिए चर्चा में रहे हैं, जिसमें गुजराती फिल्मों के सुपरस्टार मल्हार ठक्कर नायक की भूमिका निभा रहे हैं और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त निर्देशक द्वय- राहुल भोले और विनीत कनौजिया इसका निर्देशन कर रहे हैं।

इस रिपोर्ट का विवरण तथा चित्र- बॉलीवुड प्रैस एंड मीडिया फोटोग्राफर- श्री अली कबीर (कबीर एम. लव) के सौजन्य से।

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार।

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फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 में आज

पणजी, गोवा में चल रहे 50 वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 में आज 23 नवंबर की खबर यह है कि फिल्म स्टार श्री अनिल कपूर आज कला अकादमी के निकट इंटरएक्टिव डिजिटल एग्जिबिशन ‘IFFI@50’ देखने के लिए गए। प्रस्तुत हैं इस अवसर के कुछ चित्र।

चित्र और विवरण बॉलीवुड प्रेस/मीडिया फोटोग्राफर- श्री कबीर अली (कबीर एम. लव) के सौजन्य से।

नमस्कार।

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पणजी में फिल्म मेले- आईएफएफआई-2019 का दूसरा दिन

एक बार फिर से गोवा फिल्म फेस्टिवल, IFFI-2019 के बारे में लिख रहा हूँ, क्योंकि यह मेरा स्थान है और अपने निवास क्षेत्र के बारे में ऐसी गौरव भरी बात लिखना अच्छा लगता है।

 

जैसा मैंने अपनी पिछली पोस्ट में लिखा था, आजकल पणजी, गोवा में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 चल रहा है। इस उत्सव के उद्घाटन समारोह के बारे में मैंने अपनी पिछली पोस्ट में लिखा था, अब इसी उत्सव से संबंधित कुछ और जानकारी दे रहा हूँ।

एशिया के इस सबसे बड़े फिल्म समारोह के 50वें आयोजन में, जैसी कि घोषणा की गई थी, देश के सर्वमान्य सुपर स्टार, दादासाहब फाल्के सम्मान तथा अन्य अनेकानेक पुरस्कारों से अलंकृत, हिंदी फिल्म जगत के गौरव- श्री अमिताभ बच्चन की फिल्मी यात्रा की उनकी फिल्मों के माध्यम से प्रस्तुति अर्थात- रैट्रोस्पेक्टिव आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन पणजी की कला-अकादमी में किया जा रहा है, इसमें अमिताभ जी की अनेक प्रतिनिधि फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी।

 

 

श्री अमिताभ बच्चन ने कल कला अकादमी, पणजी, गोवा में  रैट्रोस्पेक्टिव का उद्घाटन किया। इस अवसर बोलते हुए श्री बच्चन ने कहा – मैं अत्यंत अभिभूत हूँ और भारत सरकार को इसके हृदय से लिए धन्यवाद देता हूँ। मैं ऐसा महसूस करता हूँ कि मैं इस सम्मान के योग्य नहीं हूँ, लेकिन मैं विनम्रतापूर्वक इसे स्वीकार करता हूँ।

इस फिल्म उत्सव के 50 वें आयोजन के अवसर पर उन्होंने कहा, “मैं भारत सरकार को यह आयोजन इतनी भव्यता के साथ करने के लिए बधाई देता हूँ। प्रतिवर्ष हम पाते हैं कि इसमें भाग लेने वाले प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ती जाती है और एक साथ हमें अनेक प्रकार की फिल्में मिलती हैं, जिससे हम विश्व भर की सृजनात्मक फिल्मों में से अपने देखने के लिए कुछ फिल्में चुन सकते हैं।”

श्री बच्चन ने कहा कि फिल्मों की दुनिया विश्व व्यापी है और यह भाषा और क्षेत्र के बंधन तोड़ देती हैं। उन्होंने कहा कि जब हम सिनेमा हॉल में बैठते हैं तब हम अपनी बगल में बैठे किसी व्यक्ति की जाति, धर्म, रंग नहीं पूछते हैं। हम सब उसी फिल्म का एक साथ आनंद लेते हैं, उस फिल्म के दृश्यों को देखकर एक साथ हंसते हैं और एक साथ रोते हैं, एक जैसी भावनाएं व्यक्त करते हैं। यह एक अत्यंत सशक्त माध्यम है और उन्होंने आशा व्यक्त की यह माध्यम पूरी निष्ठा से अपना काम करता रहेगा।

उन्होंने एक शांतिपूर्ण और प्रेम से भरी दुनिया बनाए रखने के लिए फिल्मों की भूमिका का उल्लेख किया और आशा व्यक्त की कि वे अपनी इस भूमिका को निरंतर निभाती रहेंगी।

श्री बच्चन का गोवा से खासा जुड़ाव रहा है और उन्होंने बताया कि किस प्रकार उनकी पहली फिल्म की शूटिंग भी गोवा में हुई थी। उन्होंने कहा कि गोवा आने पर उनको हमेशा ऐसा लगता है जैसे वे अपने घर आये हों। ‘यहाँ मुझे अनेक अवसर मिले हैं और लोगों का बहुत प्यार मिला है’, उन्होंने कहा।

श्री बच्चन की फिल्मों के रैट्रोस्पेक्टिव के अंतर्गत जो फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी उनमें- ‘पा’, शोले, दीवार, ब्लैक, पीकू और बदला शामिल हैं।

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इसके बाद मैं यहाँ समारोह में प्रदर्शित की जा रही एक फिल्म ‘दा हंड्रेड बक्स’ की संक्षिप्त जानकारी दे रहा हूँ।

 

 

यह मोहिनी की कहानी है, मोहिनी और उसके ऑटो चालक अब्दुल की यह एक रात की कहानी पैसे के लिए ग्राहक खोजने में पूरी रात के उनके संघर्ष को प्रदर्शित करती है । आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिल्म के निर्देशक- दुष्यंत सिंह, जो एक संगीतकार और गायक भी हैं, ने बताया कि यह फिल्म एक बहुत ही संवेदनशील विषय ‘वेश्यावृत्ति’ पर आधारित है, जिसे अक्सर दुनिया के सबसे पुराने पेशे के रूप में वर्णित किया जाता है, लेकिन समाज ने हमेशा वेश्याओं का अपमान किया है। फिल्म जनवरी 2020 में रिलीज़ होगी और पूरे भारत में प्रदर्शित की जाएगी। फिल्म में पहली बार किसी अभिनेत्री ने इस विषय में एक शक्तिशाली प्रस्तुति दी है।

 

फिल्म की अभिनेत्री कविता जो एक मॉडल है ने बताया कि यह एक अभिनेत्री के रूप में उनकी पहली फिल्म है और करियर की शुरुआत में उन्हे मुख्य किरदार के रूप में एक फिल्म मिली और यह फिल्म महिला प्रधान है । आमतौर पर यह एक पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं की स्थितियों को चित्रित करती है। क्योंकि यह फिल्म उद्योग में उसकी शुरुआत है और इस तरह की भूमिका!  एक लड़की होना मेरे लिए भी सौभाग्य की बात है। कविता के अनुसार, निर्देशक दुष्यंत एक अद्भुत निर्देशक हैं और उनके साथ मेरे लिए एक अभिनेत्री के रूप में काम करना बहुत अच्छा है क्योंकि वह एक परिवार की तरह सभी के साथ व्यवहार करते हैं। यह एक कलाकार के रूप में उनके साथ काम करने के लिए बहुत आभारी हैं। फिल्म के निर्माता रजनीश राम पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मुझे फिल्म का विषय पसंद आया! इतना कि एक निर्माता के रूप में मैंने तुरंत हां कह दिया क्योंकि ऐसी चीजें और विषय मिलना मुश्किल है जो महिलाओं के दर्द और संघर्ष को इतनी खूबसूरती से बयान कर सकते हैं। मेरे अनुसार फिल्म से जुड़े सभी अभिनेताओं और तकनीशियनों ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। दुष्यंत सिंह के साथ अपनी पुरानी दोस्ती के कारण  एक निर्देशक के रूप में उनसे अच्छा तालमेल रहा और फिल्म में एक अभिनेत्री के रूप में कविता के अभिनय से भी बहुत प्रभावित हुए हैं क्योंकि उनकी कड़ी मेहनत के कारण यह अनुमान लगाना कठिन है कि यह उनकी  पहली फिल्म है,  उन्होंने अपना किरदार इतनी अच्छी तरह से निभाया। निर्देशक दुष्यंत सिंह ने फिल्म के अन्य पात्रों के बारे में बताया जो दिनेश बावरा (अभिनेता और हास्य कवि), ज़ैद शेख – अभिनेता हैं। निशा गुप्ता अभिनेत्री ने फिल्म में शानदार काम किया है। चूंकि पूरी फिल्म रात में ही शूट की गई थी, इसलिए फिल्म का पूरा लुक बहुत यथार्थवादी लग रहा है, फिल्म में संगीत संतोष सिंह का है। फिल्म की पटकथा सलीम द्वारा लिखी गई है। फिल्म के अन्य निर्मा सहायक संदीप पुरी, विभव तोमर, प्रतिमा तोतला और रितु सिंह हैं।

 

 

इस आलेख के साथ दिए गए सभी छायाचित्र तथा विवरण बॉलीवुड के फोटोग्राफर श्री कबीर अली (कबीर एम. लव) के सौजन्य से।

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार।

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Spending the weekend, free time after work!

Today the topic that I am discussing means differently for many people, depending on their age, profession, interests etc.

 

 

Yes, how somebody spends his or her weekend or rather the free time after the working hours. Working hours also are different for different people, some people work in night shifts also, more so now a days when call-centers operate according to European working hours.

For a person like me, who retired almost 10 years ago, which period should I consider as part of working hours and which one as the free time after that. Anyway I would consider myself to be in my working days or I may say since I work as a freelancer, though I rarely remain busy in such work, I consider the normal 9 AM to 6 PM as the working hours, OK!

 

 

What one would be doing after working hours or in the weekends, may to a little extent depend on the type of work he or she does, but mostly on the taste of that individuals.

Now, I have been in London for last one and a half month, visiting my son and daughter-in-law, and every weekend we have been going around the city and other nearby cities, to explore the major tourist attractions, which included Oxford University, sea- side, Stonehenge, Bath City and many such nice places.

One could try to regularly visit nearby places that attract tourists and nature lovers, but it does not always happen. I live in Goa and there are so many wonderful beaches in Goa, which attract tourists from all over the world. My normal evening walk is also up to Miramar beach, which is 2 Kms away from my house. Actually sea is visible from the balcony of our house and we daily watch sunset over the sea from our house there.

A son of mine  has keen interest in films and theatre, he always watches the full international film festival, that is held every year in Goa. Further there is ‘Kala Academi’ in Panaji, Goa, almost 3 Kms from our house, where stage plays are regularly organized, but I have not seen any of them, I think had we been a little more nearer to that, I could have seen some, since returning from there at night is a problem, unless you drive a vehicle.

For many ladies cleaning and decorating the house is a favorite time pass and this can also be on their agenda for the weekend.

Often people go for eating out in the weekend, it could also be a small trip in the city, for me in Goa, say staying near the sea for a night or two.

Now a days people are so busy on the internet, TV also occupies an important place in spending time, people also watch their favorite programs or movies on TV in the weekend, may be through internet, which they could not watch on working days.

Naturally whenever a person gets free time, it can be utilized in his or her favorite activity, be it going places, meeting friends, watching movie or plays or may be TV programs too. Enjoying outside food also is one option for the evening or may be lunch.

This is my humble submission on the #IndiSpire prompt- How do you spend your weekends? or rather how do you spend your free time after your working hours? #TheOverlookedHalf .

Thanks for reading.

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