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उन्हें घर मुबारक हमें अपनी आहें!

काफी दिन से मैंने अपने प्रिय गायक मुकेश जी का कोई गीत शेयर नहीं किया था, आज कर लेता हूँ| जी हाँ ये गीत है 1958 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘परवरिश’ का, गीत लिखा है- हसरत जयपुरी जी ने और इसका संगीत दिया है- दत्ताराम जी ने| इस फिल्म के नायक थे मेरे प्रिय अभिनेता और महान शोमैन- राज कपूर जी|


जैसा मैंने कल भी लिखा था गीत-कविता आदि में, छोटे से कलेवर में बहुत बड़ी बात कह दी जाती है| यह लेखक की कलाकारी है, लेकिन जब इसमें अच्छा संगीत जुड़ता है और मुकेश जी जैसे महान गायक की आवाज़ जुड़ जाती है, तब छोते से, मात्र दो अंतरों के इस गीत का फैलाव, इसका आयाम कितना बड़ा हो जाता है, यह सिर्फ अनुभव से ही जाना जा सकता है|


लीजिए प्रस्तुत है यह अमर गीत-

आँसू भरी हैं ये जीवन की राहें,
कोई उनसे कह दे हमें भूल जाएं|

वादे भुला दें क़सम तोड़ दें वो,
हालत पे अपनी हमें छोड़ दें वो|
ऐसे जहाँ से क्यूँ हम दिल लगाएं,
कोई उनसे कह दे हमें भूल जाएं|


बरबादियों की अजब दास्तां हूं,
शबनम भी रोये मैं वह आस्माँ हूं|
उन्हें घर मुबारक हमें अपनी आहें|

कोई उनसे कह दे हमें भूल जाएं|



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|


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बंसी से बन्दूक बनाते, हम वो प्रेम पुजारी !

कल मैंने बाल स्वरूप राही जी की एक गजल प्रस्तुत की थी, जिसमें ताजमहल का ज़िक्र आया था| तुरंत मुझे स्वर्गीय नीरज जी का एक गीत याद आ गया| यह गीत फिल्म- प्रेम पुजारी के लिए रफी साहब की आवाज़ और सचिन दा के संगीत निर्देशन में बहुत सुंदर ढंग से फिल्माया गया है|

अभी कल ही चीन की सीमा पर हमारे 20 जाँबाज शहीद हुए हैं| जिनको अपने देश और अपनी सेनाओं पर गर्व है, उनको निश्चित रूप से नीरज जी का लिखा यह गीत अवश्य पसंद आएगा-

 

 

 

ताकत वतन की हमसे है
हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है
इंसान के हम रखवाले|

 

पहरेदार हिमालय के हम
झोंके हैं तूफ़ान के,
सुनकर गरज हमारी सीने
फट जाते चट्टान के|
ताकत वतन की हमसे है—

 

सीना है फौलाद का अपना
फूलों जैसा दिल है
तन में विंध्याचल की ताक़त, मन में ताजमहल है |
ताकत वतन की हमसे है—

 

देकर अपना खून सींचते
देश की हम फुलवारी
बंसी से बन्दूक बनाते हम वो प्रेम पुजारी
ताकत वतन की हमसे है—

 

आकर हमको कसम दे गई
राखी किसी बहन की
देंगे अपना शीश
न देंगे मिट्टी मगर वतन की|
ताकत वतन की हमसे है—

 

खतरे में हो देश अरे तब लड़ना सिर्फ धरम है
मरना है क्या चीज़ आदमी लेता नया जनम है|
ताकत वतन की हमसे है—

 

एक जान है, एक प्राण है सारा देश हमारा
नदियाँ चल कर थकी,
रुकी पर कभी न गंगा धारा |
ताकत वतन की हमसे है
हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है
इंसान के हम रखवाले|

 

आज के लिए इतना ही|
नमस्कार|

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उतरे कभी ना जो खुमार वो, प्यार है!

आज स्व. नीरज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। यह एक फिल्मी गीत है, जो उन्होंने फिल्म- प्रेम पुजारी के लिए लिखा था, जिसे एस. डी. बर्मन जी के संगीत निर्देशन में किशोर कुमार जी ने गाया था। इस गीत में नीरज ने प्रेम का एक अनोखा फार्मूला प्रस्तुत किया है।

लीजिए प्रस्तुत है यह गीत-

 

 

शोखियों में घोला जाए, फूलों का शबाब,
उसमें फिर मिलायी जाए, थोड़ी सी शराब,
होगा यूं नशा जो तैयार, वो प्यार है।

 

हँसता हुआ बचपन वो, बहका हुआ मौसम है,
छेड़ो तो इक शोला है, छूलो तो बस शबनम है,
गाँव में, मेले में, राह में, अकेले में,
आता जो याद बार-बार वो, प्यार है।
शोखियों में घोला जाये…

 

रंग में पिघले सोना, अंग से यूं रस झलके,
जैसे बजे धुन कोई, रात में हल्के हल्के,
धूप में, छाँव में, झूमती हवाओं में,
हर दम करे जो इन्तज़ार वो, प्यार है।
शोखियों में घोला जाये…

 

याद अगर वो आये, कैसे कटे तनहाई,
सूने शहर में जैसे, बजने लगे शहनाई,
आना हो, जाना हो, कैसा भी ज़माना हो,
उतरे कभी ना जो खुमार वो, प्यार है।
शोखियों में घोला जाये..

 

आज के लिए इतना ही।
नमस्कार।

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