लौट आए ख़ुदा ख़ुदा करके!

घर से निकले थे हौसला करके,
लौट आए ख़ुदा ख़ुदा करके|

राजेश रेड्डी

सजाने को मुसीबत नहीं मिलती!

निकला करो ये शम्अ लिए घर से भी बाहर,
तन्हाई सजाने को मुसीबत नहीं मिलती|

निदा फ़ाज़ली

घर से निकलते क्यों हैं!

लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं,
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं|

राहत इन्दौरी

बाहर वही निकलते हैं!

जिनके अंदर चिराग़ जलते हैं,
घर से बाहर वही निकलते हैं।

सूर्यभानु गुप्त