जिसमें मिला दो लगे उस जैसा!

आज मैं संतोषानंद जी का एक गीत शेयर करना चाहता हूँ, संतोषानंद जी को मैं लाल किले में राष्ट्रीय दिवसों पर आयोजित कवि-सम्मेलनों के ज़माने से सुनता रहा हूँ, जहां उन दिनों श्री गोपाल प्रसाद व्यास जी आयोजन का संचालन करते थे और जब वे बेटा संतोषानंद कहते हुए उनको आवाज़ लगाते थे तब वे गुरुदेव पुकारते हुए व्यास जी के चरणों में गिर जाते थे|

संतोषानंद जी ने फिल्मों में काफी नाम और धन कमाया लेकिन उसके बाद फिर उन पर मुसीबतें आ गईं| मैं उनके सुखी जीवन की कामना करता हूँ|

लीजिए आज प्रस्तुत है संतोषानंद जी का यह फिल्मी गीत, जिसे फिल्म- ‘शोर’ के लिए लता जी और मुकेश जी ने लक्ष्मीकांत प्यारेलाल जी के संगीत निर्देशन में बहुत खूबसूरत तरीके से गाया था-

पानी रे पानी तेरा रंग कैसा
जिसमें मिला दो लगे उस जैसा

इस दुनिया में जीनेवाले ऐसे भी हैं जीते
रूखीसूखी खाते हैं और ठंडा पानी पीते।
तेरे एक ही घूँट में मिलता जन्नत का आराम
पानी रे पानी तेरा रंग कैसा
भूखे की भूख और प्यास जैसा।

गंगा से जब मिले तो बनता गंगाजल तू पावन
बादल से तू मिले तो रिमझिम बरसे सावन
सावन आया सावन आया रिमझिम बरसे पानी
आग ओढ़कर आग पहनकर, पिघली जाए जवानी
कहीं पे देखो छत टपकती, जीना हुआ हराम
पानी रे पानी तेरा रंग कैसा
दुनिया बनाने वाले रब जैसा।

वैसे तो हर रंग में तेरा जलवा रंग जमाए
जब तू फिरे उम्मीदों पर तेरा रंग समझ ना आए
कली खिले तो झट आ जाए पतझड़ का पैगाम
पानी रे पानी तेरा रंग कैसा
सौ साल जीने की उम्मीदों जैसा।


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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प्रेम की गंगा बहाते चलो!

आज पंडित भारत व्यास जी का लिखा एक सुंदर गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| भारत व्यास जी ने हमारी फिल्मों को बहुत से अमर गीत दिए हैं| आज मैं फिल्म- ‘संत ज्ञानेश्वर’ का यह गीत शेयर कर रहा हूँ जिसका संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल जी की प्रसिद्ध जोड़ी ने दिया था और इसको लता मंगेशकर जी और मुकेश जी ने अपने मधुर स्वरों में गाया है जो आज तक हमारे मन में गूँजता है|   

लीजिए आज प्रस्तुत हैं इस मधुर गीत के बोल –

ज्योत से ज्योत जगाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो,
राह में आए जो दीन दुखी, सबको गले से लगाते चलो|

जिसका न कोई संगी साथी ईश्वर है रखवाला
जो निर्धन है जो निर्बल है वह है प्रभू का प्यारा
प्यार के मोती लुटाते चलो, प्रेम की गंगा…

आशा टूटी ममता रूठी छूट गया है किनारा
बंद करो मत द्वार दया का दे दो कुछ तो सहारा
दीप दया का जलाते चलो, प्रेम की गंगा…


छाया है घनघोर अंधेरा भटक गई हैं दिशाएं
मानव बन बैठा है दानव किसको व्यथा सुनाएं
धरती को स्वर्ग बनाते चलो, प्रेम की गंगा…

ज्योत से ज्योत जगाते चलो प्रेम की गंगा बहाते चलो
राह में आए जो दीन दुखी सब को गले से लगाते चलो
प्रेम की गंगा बहाते चलो …

कौन है ऊँचा कौन है नीचा सब में वो ही समाया
भेद भाव के झूठे भरम में ये मानव भरमाया
धर्म ध्वजा फहराते चलो, प्रेम की गंगा …


सारे जग के कण कण में है दिव्य अमर इक आत्मा
एक ब्रह्म है एक सत्य है एक ही है परमात्मा
प्राणों से प्राण मिलाते चलो, प्रेम की गंगा …

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार| 

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आ अब लौट चलें!

आज फिर से मैं, हम सबके प्रिय गायक मुकेश जी और लता मंगेशकर जी के गाये एक युगल गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ, यह गीत राज कपूर जी की अद्वितीय फिल्म ‘जिस देश में गंगा बहती है’ के लिए लिखा था शैलेन्द्र जी ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया था शंकर-जयकिशन की प्रसिद्ध जोड़ी ने| इस गीत में लता जी के स्वर में ‘आ जा रे’ की पुकार गूँजती है, बाकी गीत मुकेश जी ने गाया है|

 राज कपूर साहब की इस फिल्म ने बहुत महान संदेश दिया था और यह बड़ी बात है कि जय प्रकाश नारायण जी द्वारा डाकुओं का आत्म-समर्पण कराए जाने से बहुत पहले राज कपूर जी ने इस फिल्म में एक दीवाने नायक के माध्यम से फिल्म में यह काम करा दिया था|

  लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी और लता जी के स्वर में, यह मधुर गीत:

आ अब लौट चलें,
नैन बिछाये, बाहें पसारे
तुझको पुकारे देश तेरा|

आ जा रे, आ जा , आ जा

सहज है सीधी राह पे चलना
देख के उलझन बच के निकलना,
कोई ये चाहे माने ना माने
बहुत है मुश्किल गिर के संभलना|
आ अब लौट चलें|
आ जा रे, आ जा , आ जा

आँख हमारी मंज़िल पर है,
दिल में खुशी की मस्त लहर है,
लाख लुभाएं महल पराये
अपना घर फिर अपना घर है|
आ अब लौट चलें|

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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प्यासी है ज़िंदगी और मुझे प्यार दो!

आज फिर से मैं, मुकेश जी और लता मंगेशकर जी के गाये एक युगल गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ, यह गीत फिल्म ‘फिल्म-होली आई रे’ के लिए लिखा था क़मर जलालाबादी साहब ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया था कल्याणजी-आनंदजी की प्रसिद्ध जोड़ी ने|

लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी और लता जी के स्वर में, हमारी स्मृतियों में बसा यह मधुर गीत:

मुकेश- मेरी तमन्नाओं की तक़दीर तुम सँवार दो
प्यासी है ज़िंदगी और मुझे प्यार दो|

नील गगन मण्डप है सारा जग बराती
मन के फेरे सच्चे, सच्चे हैं हम साथी
लाज का ये घूँघट पट आज तो उतार दो
प्यासी है ज़िंदगी …

धरती करवट बदले, बदले हर मौसम
प्रीत के पुजारी हैं बदलेंगे नहीं हम
पतझड़ सा जीवन है, प्यार की बहार दो
प्यासी है ज़िंदगी …


लता- मेरी तमन्नाओं की तकदीर तुम सँवार दो
प्यासी है ज़िन्दगी तुम मुझे प्यार दो|

प्यार का अकाल पड़ा सारे ही जग में
धोखे हुए हर दिल में, नफ़रत है रग-रग में
सबने डुबोया है मुझे, पार तुम उतार दो|

खुशी यहाँ थोड़ी सी और बहुत ग़म हैं
जितना भी प्यार मिले, उतना ही कम है
ग़म से भरे जीवन को प्यार से निखार दो|
प्यासी है ज़िन्दगी तुम मुझे प्यार दो|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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जाने न नज़र पहचाने जिगर!

एक बार फिर से मैं, हम सबके प्रिय गायक मुकेश जी और लता मंगेशकर जी के गाये एक युगल गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ, यह गीत राज कपूर साहब की फिल्म ‘आह’ के लिए लिखा था हसरत जयपुरी जी ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया था शंकर-जयकिशन की प्रसिद्ध जोड़ी ने|

लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी और लता जी के स्वर में, राज कपूर साहब की फिल्म- ‘आह’ का हमारे मन में बसा हुआ यह रोमांटिक गीत:


जाने न नज़र पहचाने जिगर
ये कौन जो दिल पर छाया
मेरा अंग अंग मुस्काया|

आवाज़ ये किसकी आती है
जो छेड़ के दिल को जाती है|
मैं सुन के जिसे शर्मा जाऊँ
है कौन जो दिल में समाया
मेरा अंग अंग मुस्काया|

जाने न नज़र पहचाने जिगर
ये कौन जो दिल पर छाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया|

ढूँढेंगे उसे हम तारों में
सावन की ठण्डी बहारों में,
पर हम भी किसी से कम तो नहीं
क्यों रूप को अपने छुपाया
मुझे रोज़ रोज़ तड़पाया|

बिन देखे जिसको प्यार करूँ
गर देखूँ उसको जान भी दूँ|
एक बार कहो ओ जादूगर
ये कौन सा खेल रचाया
मेरा अंग अंग मुस्काया|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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तुझे कसम है आ भी जा!

आज फिर से मैं मुकेश जी और लता मंगेशकर जी के गाये एक और युगल गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ, इस गीत के बोल शैलेन्द्र जी ने लिखे थे| फिल्म ‘मधुमती’ के लिए इसका संगीत तैयार किया था सलिल चौधरी जी ने|

लीजिए प्रस्तुत है लता मंगेशकर जी और मुकेश जी के युगल स्वरों में यह मधुर गीत:



मुकेश : दिल तड़प तड़प के कह रहा है आ भी जा
तू हमसे आँख ना चुरा, तुझे कसम है आ भी जा

तू नहीं तो ये बहार क्या बहार है
गुल नहीं खिले तो तेरा इन्तज़ार है
के तेरा इन्तज़ार है|
दिल तड़प तड़प …

लता: आ आ
दिल धड़क धड़क के दे रहा है ये सदा
तुम्हारी हो चुकी हूँ मैं
तुम्हारे साथ हूँ सदा|

तुमसे मेरी ज़िन्दगी का ये सिंगार है
जी रही हूँ मैं के मुझको तुमसे प्यार है
के मुझको तुमसे प्यार है|


मुकेश: दिल तड़प तड़प के कह रहा है …

मुस्कुरा के प्यार का असर है हर कहीं
दिल कहाँ है हम किधर हैं कुछ खबर नहीं|
किधर है कुछ खबर नहीं|

दिल तड़प तड़प के कह रहा है आ भी जा
तू हमसे आँख ना चुरा, तुझे कसम है आ भी जा|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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मेरे हमसफ़र

आज फिर से मैं मुकेश जी और लता मंगेशकर जी के गाये एक युगल गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ, जो कि आनंद बख्शी जी ने लिखे थे| फिल्म ‘मेरे हमसफ़र’ के लिए इसका संगीत तैयार किया था कल्याणजी आनंदजी की संगीतमय जोड़ी ने|

लीजिए प्रस्तुत है लता मंगेशकर जी और मुकेश जी के युगल स्वरों में यह मधुर गीत:


किसी राह में, किसी मोड़ पर
कहीं चल ना देना तू छोड़कर,
मेरे हमसफ़र, मेरे हमसफ़र|

किसी हाल में, किसी बात पर
कहीं चल ना देना तू छोड़कर,
मेरे हमसफ़र, मेरे हमसफ़र

मेरा दिल कहे कहीं ये ना हो,
नहीं ये ना हो, नहीं ये ना हो
किसी रोज तुझ से बिछड़ के मैं,
तुझे ढूँढती फिरू दरबदर|

तेरा रंग साया बहार का,
तेरा रूप आईना प्यार का
तुझे आ नज़र में छुपा लूँ मैं,
तुझे लग ना जाये कहीं नज़र

तेरा साथ है तो है ज़िन्दगी,
तेरा प्यार है तो है रोशनी
कहाँ दिन ये ढल जाये क्या पता,
कहाँ रात हो जाये क्या खबर|

मेरे हमसफ़र, मेरे हमसफ़र|

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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महबूब मेरे महबूब मेरे!

आज फिर से मैं हम सबके प्यारे मुकेश जी का गाया एक बहुत सुंदर गीत शेयर कर रहा हूँ| मजरूह सुल्तानपुरी साहब का लिखा यह गीत मुकेश जी और लता जी ने फिल्म- ‘फिल्म पत्थर के सनम’ के लिए गाया था, इसका संगीत तैयार किया था लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की सुरीली जोड़ी ने|

लीजिए प्रस्तुत है मनोज कुमार जी और वहीदा जी पर फिल्माया गया यह गीत जो इतने समय बाद आज भी बड़े चाव से सुना जाता है –


महबूब मेरे महबूब मेरे
तू है तो दुनिया कितनी हसीं है
जो तू नहीं तो कुछ भी नहीं हैं
महबूब मेरे महबूब मेरे
तू है तो दुनिया कितनी हसीं है|

तू हो तो बढ़ जाती है कीमत मौसम की
ये जो तेरी आंखें हैं शोला शबनम की
यहीं मरना भी है मुझको
मुझे जीना भी यहीं है|
महबूब मेरे महबूब मेरे|

अरमां जिसको जन्नत की रंगीं गलियों का
उसको तेरा दामन है बिस्तर कलियों का
जहां पर हैं तेरी बाहें
मेरी जन्नत भी वही है
महबूब मेरे महबूब मेरे|


रख दे मुझको तू अपना दीवाना करके
नज़दीक आ जा फिर देखूं तुझको जी भर के
मेरे जैसे होंगे लाखों, कोई भी तुझसा नहीं हैं
महबूब मेरे महबूब मेरे|


आज के लिए इतना ही,

नमस्कार
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बहारो थाम लो अब दिल!

आज फिर से एक बार मैं एक युगल गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे लता मंगेशकर जी और मुकेश जी ने गाया है| फिल्म – ‘नमस्ते जी’ के लिए यह गीत लिखा था अंजान साहब ने और इसका संगीत दिया था जी एस. कोहली जी ने| मुकेश जी और लता जी के बहुत से रोमांटिक गीतों में यह गीत भी शामिल है|

लीजिए आज प्रस्तुत है यह मधुर गीत-


बहारो थाम लो अब दिल,
मेरा महबूब आता है,
शरारत कर न नाजुक दिल
शरम से डूब जाता है|

कहर अंदाज़ हैं तेरे,
क़यामत हैं तेरी बातें|
मेरी तो जान लेंगे
ये बातें ये मुलाकातें|
सनम शरमाए जब ऐसे,
मज़ा कुछ और आता है|


शरारत कर न नाजुक दिल
शरम से डूब जाता है|

लबों पर ये हँसी कातिल,
गज़ब जादू निगाहों में,
कसम तुझको मुहब्बत की
मचल ऐसे न राहों में|
मचल जाता है दिल जब
रू-ब-रू दिलदार आता है|

बहारो थाम लो अब दिल,
मेरा महबूब आता है,
शरारत कर न नाजुक दिल
शरम से डूब जाता है|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
* *****

छोड़ गए बालम!

आज एक बार फिर से मैं राज कपूर साहब की एक फिल्म- बरसात का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे लता मंगेशकर जी और मुकेश जी ने गाया है| यह गीत लिखा था मजरूह सुल्तानपुरी साहब ने और इसका संगीत दिया था शंकर जयकिशन की जोड़ी ने| जैसा कि आप गीत के बोल पढ़कर याद कर सकते हैं, यह बहुत ही प्यारा गीत है|

लीजिए प्रस्तुत है यह मधुर गीत-


छोड़ गए बालम
मुझे हाय अकेला छोड़ गए
तोड़ गए बालम
मेरा प्यार भरा दिल तोड़ गए|

छूट गया बालम
हाय साथ हमारा छूट गया|
टूट गया बालम
मेरा प्यार भरा दिल टूट गया|


फूल संग मुस्काएं कलियाँ
मैं कैसे मुस्काऊँ
बादल देख के भर आई अंखियाँ
छम-छम नीर बहाऊँ
मैं छम-छम नीर बहाऊँ|

छूट गया बालम
हाय साथ हमारा छूट गया,
टूट गया बालम
मेरा प्यार भरा दिल टूट गया|


दिल की लगी को क्या कोई जाने
मैं जानूं दिल जाने,
पलकों की छाया में नाचे
दर्द भरे अफ़साने
हाय दर्द भरे अफ़सा
ने,

छोड़ गए बालम
मुझे हाय अकेला छोड़ गए|
तोड़ गए बालम
मेरा प्यार भरा दिल तोड़ गए|


पहले मन में आग लगी और
फिर बरसी बरसात,
ऐसी चली बिरहा की आंधी
तड़पत हूँ दिन-रात
मैं तड़पत हूँ दीन-रात|


छूट गया बालम
हाय साथ हमारा छूट गया|
छोड़ गए बालम
मुझे हाय अकेला छोड़ गए|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
******