हम घर से कमाने निकल आए!

मुमकिन है हमें गाँव भी पहचान न पाए,
बचपन में ही हम घर से कमाने निकल आए|

मुनव्वर राना

ख़ज़ाने निकल आए!

माँ बैठ के तकती थी जहाँ से मिरा रस्ता,
मिट्टी के हटाते ही ख़ज़ाने निकल आए|

मुनव्वर राना

ख़त उसके पुराने निकल आए!

अलमारी से ख़त उसके पुराने निकल आए,
फिर से मिरे चेहरे पे ये दाने निकल आए|

मुनव्वर राना

उसका गुज़रना पास से मेरे!

नज़र नीची किए उसका गुज़रना पास से मेरे,
ज़रा सी देर रुकना फिर सबा-रफ़्तार हो जाना|

मुनव्वर राना

ख़ुद-मुख़्तार हो जाना!

मोहब्बत इक न इक दिन ये हुनर तुमको सिखा देगी,
बग़ावत पर उतरना और ख़ुद-मुख़्तार हो जाना|

मुनव्वर राना

अब भी कोई ख़्वाब लगता है!

कहानी का ये हिस्सा अब भी कोई ख़्वाब लगता है,
तिरा सर पर बिठा लेना मिरा दस्तार हो जाना|

मुनव्वर राना

उसके लिए दुश्वार हो जाना!

बहुत दुश्वार है मेरे लिए उसका तसव्वुर भी,
बहुत आसान है उसके लिए दुश्वार हो जाना|

मुनव्वर राना

आपका दीवार हो जाना!

कभी जब आँधियाँ चलती हैं हमको याद आता है,
हवा का तेज़ चलना आपका दीवार हो जाना|

मुनव्वर राना

आपका अख़बार हो जाना!

वो अपना जिस्म सारा सौंप देना मेरी आँखों को,
मिरी पढ़ने की कोशिश आपका अख़बार हो जाना|

मुनव्वर राना

मिरा बीमार हो जाना!

किसी दिन मेरी रुस्वाई का ये कारन न बन जाए,
तुम्हारा शहर से जाना मिरा बीमार हो जाना|

मुनव्वर राना