वो आपका गुलनार हो जाना!

ख़फ़ा होना ज़रा सी बात पर तलवार हो जाना,
मगर फिर ख़ुद-ब-ख़ुद वो आपका गुलनार हो जाना|

मुनव्वर राना

सारे रास्तों की याद बचपन में!

लिपट जाती है सारे रास्तों की याद बचपन में,
जिधर से भी गुज़रता हूँ मैं रस्ता याद रहता है|

मुनव्वर राना

परिंदा तो वही होता है-

अगर सोने के पिंजड़े में भी रहता है तो क़ैदी है,
परिंदा तो वही होता है जो आज़ाद रहता है|

मुनव्वर राना

इसलिए बरबाद रहता है!

भुला पाना बहुत मुश्किल है सब कुछ याद रहता है,
मोहब्बत करने वाला इसलिए बरबाद रहता है|

मुनव्वर राना

इतवार होना चाहिए!

अपनी यादों से कहो इक दिन की छुट्टी दे मुझे,
इश्क़ के हिस्से में भी इतवार होना चाहिए|

मुनव्वर राना

घर-बार होना चाहिए!

ज़िंदगी तू कब तलक दर-दर फिराएगी हमें,
टूटा-फूटा ही सही घर-बार होना चाहिए|

मुनव्वर राना

अख़बार होना चाहिए!

ऐरे-ग़ैरे लोग भी पढ़ने लगे हैं इन दिनों,
आप को औरत नहीं अख़बार होना चाहिए|

मुनव्वर राना

हमको पार होना चाहिए!

आप दरिया हैं तो फिर इस वक़्त हम ख़तरे में हैं,
आप कश्ती हैं तो हमको पार होना चाहिए|

मुनव्वर राना

इश्क़ का इज़हार होना चाहिए!

आपको चेहरे से भी बीमार होना चाहिए,
इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिए|

मुनव्वर राना

मेरे घर का रुख़ भी कर लेती!

कभी ऐ ख़ुश-नसीबी मेरे घर का रुख़ भी कर लेती,
इधर पहुँची, उधर पहुँची, यहाँ आई, वहाँ आई|

मुनव्वर राना