उस पर निशाँ नहीं मिलता!

वो तेग़ मिल गई जिस से हुआ है क़त्ल मिरा,
किसी के हाथ का उस पर निशाँ नहीं मिलता|

कैफ़ी आज़मी

तुम्हारी दीवार गल रही है!

मैं क़त्ल तो हो गया तुम्हारी गली में लेकिन,
मेरे लहू से तुम्हारी दीवार गल रही है|

जावेद अख़्तर

ये काम किसका था!

वो क़त्ल करके मुझे हर किसी से पूछते हैं,
ये काम किसने किया है, ये काम किसका था|

दाग़ देहलवी

मरने की आसानी दे मौला!

तेरे होते कोई किसी की जान का दुश्मन क्यों हो,
जीने वालों को मरने की आसानी दे मौला |

निदा फ़ाज़ली