कोशिश करने वालों की हार नहीं होती!

कुछ रचना पंक्तियाँ ऐसी लिखी जाती हैं कि वे मुहावरा बन जाती हैं| जैसे डॉ बशीर बद्र जी का एक शेर था- ‘उजाले अपनी यादों के, हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए|’ ऐसी ही एक पंक्ति आज की कविता की है, जिसको अक्सर लोग कहावत की तरह … Read more

राष्ट्रीयता और राष्ट्रद्रोह

मैं इन दिनों लंदन प्रवास में हूँ और यहाँ की वर्तमान और पिछले वर्ष की यात्राओं के अनुभव इन दिनों शेयर कर रहा हूँ। ये अनुभव मैं आगे भी शेयर करता रहूंगा। इस बीच एक और विषय पर बात करने का मन है, अभी ‘राष्ट्र, राष्ट्रीयता और राष्ट्रद्रोह’ विषय पर चर्चा चल रही थी, इस … Read more

Nationalism, Patriotism, Chauvinism!

The idea of nationalism is most relevant today . Though in our holy scriptures it is written ‘Janani Janmabhumishcha, Svargaadapi Gariyasi’ i.e. The mother and motherland are more precious than heaven.     The biggest problem today is that many people are very much confused about this. Many confusions are created by some selfish politicians … Read more

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