खामोशी पहचाने कौन 5

किरन-किरन अलसाता सूरजपलक-पलक खुलती नींदेंधीमे-धीमे बिखर रहा हैज़र्रा-ज़र्रा जाने कौन । निदा फाज़ली

खामोशी पहचाने कौन 3

जाने क्या-क्या बोल रहा थासरहद, प्यार, किताबें, ख़ूनकल मेरी नींदों में छुपकरजाग रहा था जाने कौन । निदा फाज़ली

ख़ामोशी पहचाने कौन 1

मुँह की बात सुने हर कोईदिल के दर्द को जाने कौनआवाज़ों के बाज़ारों मेंख़ामोशी पहचाने कौन । निदा फाज़ली

जब भी जुड़े बांटा गया

निदा फ़ाज़ली साहब मेरे अत्यंत प्रिय शायर रहे हैं, बहुत सुंदर गीत, ग़ज़लें और नज़्में उन्होंने लिखी हैं, दोहे ऐसे-ऐसे कि ‘मैं रोया परदेस में, भीगा माँ का प्यार’, और इसे ग़ज़ल कहें या भजन- ‘गरज, बरस प्यासी धरती पर, फिर पानी दे मौला’, ‘घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर लें, किसी … Read more

लेकिन मकाँ नहीं मिलता!

निदा फ़ाज़ली साहब मेरे अत्यंत प्रिय शायर रहे हैं| उनमें कवि-शायर और संत, सबके गुण शामिल थे| क्या दोहे, क्या ग़ज़लें और क्या गीत, हर जगह उन्होंने अपना कमाल दिखाया था| उनकी प्रमुख विशेषता थी सरल भाषा में गहरी बात कहना| लीजिए आज निदा फ़ाज़ली साहब की इस ग़ज़ल का आनंद लीजिए- कभी किसी को … Read more

खामोशी पहचाने कौन!

एक बार फिर से आज मैं अपने अत्यंत प्रिय शायरों में से एक, स्वर्गीय निदा फ़ाज़ली साहब का लिखा एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे जगजीत सिंह-चित्रा सिंह की सुरीली जोड़ी ने बहुत खूबसूरत अंदाज में गाया है| निदा फ़ाज़ली साहब ने कुछ बेमिसाल गीत, ग़ज़लें और दोहे लिखे हैं और यह भी उनमें … Read more

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