अब तक डरी नहीं है दुनिया!

भाग रही है गेंद के पीछे
जाग रही है चाँद के नीचे,
शोर भरे काले नारों से
अब तक डरी नहीं है दुनिया

निदा फ़ाज़ली

अब तक खुली नहीं है दुनिया!

घर में ही मत इसे सजाओ,
इधर-उधर भी ले के जाओ|
यूँ लगता है जैसे तुमसे
अब तक खुली नहीं है दुनिया|

निदा फ़ाज़ली

सबकी वही नहीं है दुनिया!

चार घरों के एक मुहल्ले
के बाहर भी है आबादी,
जैसी तुम्हें दिखाई दी है
सबकी वही नहीं है दुनिया|

निदा फ़ाज़ली

तुमसे मिली नहीं है दुनिया!

जितनी बुरी कही जाती है
उतनी बुरी नहीं है दुनिया,
बच्चों के स्कूल में शायद
तुमसे मिली नहीं है दुनिया|

निदा फ़ाज़ली

दिल की हार हो ऐसा नहीं होता!

कहीं तो कोई होगा जिसको अपनी भी ज़रूरत हो,
हरेक बाज़ी में दिल की हार हो ऐसा नहीं होता|

निदा फ़ाज़ली

सिखा देती है चलना ठोकरें भी!

सिखा देती है चलना ठोकरें भी राहगीरों को,
कोई रस्ता सदा दुशवार हो ऐसा नहीं होता|

निदा फ़ाज़ली

कहानीकार हो ऐसा नहीं होता!

कहानी में तो किरदारों को जो चाहे बना दीजे,
हक़ीक़त भी कहानीकार हो ऐसा नहीं होता|

निदा फ़ाज़ली

रोज़ ही मंझदार हो ऐसा नहीं होता!

हरेक कश्ती का अपना तज़ुर्बा होता है दरिया में,
सफर में रोज़ ही मंझदार हो ऐसा नहीं होता|

निदा फ़ाज़ली

एक ही से प्यार हो ऐसा नहीं होता!

जो हो इक बार, वह हर बार हो ऐसा नहीं होता,
हमेशा एक ही से प्यार हो ऐसा नहीं होता|

निदा फ़ाज़ली