रात को चमकाओ किसी दिन!

गुज़रें जो मेरे घर से तो रुक जाएँ सितारे,
इस तरह मिरी रात को चमकाओ किसी दिन|

अमजद इस्लाम अमजद

सितारों तुम तो सो जाओ!

परेशाँ रात सारी है सितारों तुम तो सो जाओ,
सुकूत-ए-मर्ग तारी है सितारों तुम तो सो जाओ|

क़तील शिफ़ाई

हाथ उठाकर दुआएँ करने लगे!

अँधेरे चारों तरफ़ सायं-सायं करने लगे,
चिराग़ हाथ उठाकर दुआएँ करने लगे|

राहत इन्दौरी

तारों से झाँकता है मुझे!

रात तनहाइयों के आंगन में,
चांद तारों से झाँकता है मुझे|

बेकल उत्साही

उस भोर तक जाती तो है!

एक चादर साँझ ने सारे नगर पर डाल दी,
यह अँधेरे की सड़क उस भोर तक जाती तो है|

दुष्यंत कुमार

शर्माना क्या घबराना क्या!

फिर हिज्र की लम्बी रात मियाँ संजोग की तो यही एक घड़ी।
जो दिल में है लब पर आने दो शर्माना क्या घबराना क्या॥

इब्ने इंशा

कट-कट के सहर तक पहुँची!

तुम तो सूरज के पुजारी हो तुम्हे क्या मालूम,
रात किस हाल में कट-कट के सहर तक पहुँची|

राहत इन्दौरी