मैं तो मगर प्यासा नहीं!

जा दिखा दुनिया को मुझ को क्या दिखाता है ग़ुरूर,
तू समुंदर है तो है मैं तो मगर प्यासा नहीं|

वसीम बरेलवी  

अभी पीना-पिलाना चल रहा है!

समुंदर से किसी दिन फिर मिलेंगे,
अभी पीना-पिलाना चल रहा है|

राहत इन्दौरी

एक जज़ीरे की तरह डूब रहा हूँ!

दुनिया मुझे साहिल से खड़ी देख रही है,
मैं एक जज़ीरे की तरह डूब रहा हूँ|

मुनव्वर राना

दरिया की अना का होता!

यूँ भी इक बार तो होता कि समुंदर बहता,
कोई एहसास तो दरिया की अना का होता|

गुलज़ार

जो चाहते हैं समुंदर-कशी के साथ!

क़तरे वो कुछ भी पाएँ ये मुमकिन नहीं ‘वसीम’,
बढ़ना जो चाहते हैं समुंदर-कशी के साथ|

वसीम बरेलवी

समुंदर की तरफ़ जाना भी!

ख़ुद को पहचान के देखे तो ज़रा ये दरिया,
भूल जाएगा समुंदर की तरफ़ जाना भी|

वसीम बरेलवी

तो समुंदर तलाश कर!

सूरज के इर्द-गिर्द भटकने से फ़ाएदा,
दरिया हुआ है गुम तो समुंदर तलाश कर|

निदा फ़ाज़ली

इक समुंदर कह रहा था-

मैंने अपनी ख़ुश्क आँखों से लहू छलका दिया,
इक समुंदर कह रहा था मुझको पानी चाहिए|

राहत इंदौरी

आँख तक आ भी नहीं सकता!

क्या दुख है समुंदर को बता भी नहीं सकता,
आँसू की तरह आँख तक आ भी नहीं सकता|

वसीम बरेलवी

इतना फ़ासला क्यूँ है!

सवाल कर दिया तिश्ना-लबी ने साग़र से,
मेरी तलब से तिरा इतना फ़ासला क्यूँ है|

राही मासूम रज़ा