गुनगुनाती रही वेदना!

आज फिर से हिंदी काव्य मंचों के एक पुराने लोकप्रिय हस्ताक्षर- स्व. गोपाल सिंह नेपाली जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। गीत स्वयं अपनी बात कहता है, इसलिए मुझे ज्यादा कहने की आवश्यकता नहीं, लीजिए इस गीत का आनंद लीजिए-     तुम जलाकर दिये, मुँह छुपाते रहे, जगमगाती रही कल्पना। रात जाती … Read more

यह बात किसी से मत कहना!

आज फिर हिंदी कवि सम्मेलनों में काफी लोकप्रिय कवि रहे- स्व. देवराज दिनेश जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। स्व. देवराज दिनेश जी वैसे व्यंग्य कविताओं के लिए प्रसिद्ध थे, लेकिन उन्होंने बहुत से गीत भी लिखे थे और यह उनके प्रिय गीतों में से एक है। यह एक प्रेमगीत है या कहें … Read more

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