चन्द्रमुखी था नाम!


एक बार फिर से मैं, हम सबके प्रिय गायक मुकेश जी का गाये एक गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ, यह गीत पुरानी फिल्म ‘चंद्रमुखी’ के लिया लिखा था पंडित भारत व्यास जी ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया था एस एन त्रिपाठी जी ने|

लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी के स्वर में, हमारे मन में गूंजने वाला यह मधुर गीत:

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नैन का चैन चुराकर ले गई
कर गई नींद हराम
चन्द्रमा सा मुख था उसका
चन्द्रमुखी था नाम
नैन का चैन चुराकर ले गई …

अँखियां नीली और नशीली
दिल में बस गई वो लजीली,
चाँदनी थी मद भरी थी
गगन से उतरी परी थी
याद है वो दिन सुहाना
वो सुहानी शाम|
नैन का चैन चुराकर ले गयी …

सुन रहा हूँ वो पैजनिया
बन में नाची एक हिरनिया
याद खोई फिर जगी थी
जानी पहचानी लगी थी
नैन मिलते ही नयन से
मन हुआ बदनाम|
नैन का चैन चुराकर ले गयी …


कैसी थी वो क्या कहूँ मैं
इसलिये चुप-चुप रहूँ मैं
प्यार का सिंगार थी वो
स्वप्न का साकार थी वो
उस विधाता की कला की
थी वो पूर्ण विराम|
नैन का चैन चुराकर ले गई …


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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कितने भूले हुए ज़ख़्मों का पता याद आया!

आज मैं साहिर लुधियानवी साहब का लिखा एक गीत शेयर कर रहा हूँ| साहिर साहब का यह गीत फिल्म-‘गुमराह’ के लिए महेंद्र कपूर जी ने गाया था और इसका संगीत तैयार किया था रवि जी ने|

लीजिए आज प्रस्तुत है, साहिर लुधियानवी साहब का यह गीत –


आप आए तो ख़याल-ए-दिल-ए नाशाद आया
कितने भूले हुए ज़ख़्मों का पता याद आया

आप के लब पे कभी अपना भी नाम आया था
शोख नज़रों से मुहब्बत का सलाम आया था
उम्र भर साथ निभाने का पयाम आया था
आपको देख के वह अहद-ए-वफ़ा याद आया

रुह में जल उठे बजती हुई यादों के दिए
कैसे दीवाने थे हम आपको पाने के लिए
यूँ तो कुछ कम नहीं जो आपने एहसान किए
पर जो माँगे से न पाया वो सिला याद आया

आज वह बात नहीं फिर भी कोई बात तो है
मेरे हिस्से में यह हल्की-सी मुलाक़ात तो है
ग़ैर का हो के भी यह हुस्न मेरे साथ तो है
हाय ! किस वक़्त मुझे कब का गिला याद आया



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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तुझे कसम है आ भी जा!

आज फिर से मैं मुकेश जी और लता मंगेशकर जी के गाये एक और युगल गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ, इस गीत के बोल शैलेन्द्र जी ने लिखे थे| फिल्म ‘मधुमती’ के लिए इसका संगीत तैयार किया था सलिल चौधरी जी ने|

लीजिए प्रस्तुत है लता मंगेशकर जी और मुकेश जी के युगल स्वरों में यह मधुर गीत:



मुकेश : दिल तड़प तड़प के कह रहा है आ भी जा
तू हमसे आँख ना चुरा, तुझे कसम है आ भी जा

तू नहीं तो ये बहार क्या बहार है
गुल नहीं खिले तो तेरा इन्तज़ार है
के तेरा इन्तज़ार है|
दिल तड़प तड़प …

लता: आ आ
दिल धड़क धड़क के दे रहा है ये सदा
तुम्हारी हो चुकी हूँ मैं
तुम्हारे साथ हूँ सदा|

तुमसे मेरी ज़िन्दगी का ये सिंगार है
जी रही हूँ मैं के मुझको तुमसे प्यार है
के मुझको तुमसे प्यार है|


मुकेश: दिल तड़प तड़प के कह रहा है …

मुस्कुरा के प्यार का असर है हर कहीं
दिल कहाँ है हम किधर हैं कुछ खबर नहीं|
किधर है कुछ खबर नहीं|

दिल तड़प तड़प के कह रहा है आ भी जा
तू हमसे आँख ना चुरा, तुझे कसम है आ भी जा|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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मेरे हमसफ़र

आज फिर से मैं मुकेश जी और लता मंगेशकर जी के गाये एक युगल गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ, जो कि आनंद बख्शी जी ने लिखे थे| फिल्म ‘मेरे हमसफ़र’ के लिए इसका संगीत तैयार किया था कल्याणजी आनंदजी की संगीतमय जोड़ी ने|

लीजिए प्रस्तुत है लता मंगेशकर जी और मुकेश जी के युगल स्वरों में यह मधुर गीत:


किसी राह में, किसी मोड़ पर
कहीं चल ना देना तू छोड़कर,
मेरे हमसफ़र, मेरे हमसफ़र|

किसी हाल में, किसी बात पर
कहीं चल ना देना तू छोड़कर,
मेरे हमसफ़र, मेरे हमसफ़र

मेरा दिल कहे कहीं ये ना हो,
नहीं ये ना हो, नहीं ये ना हो
किसी रोज तुझ से बिछड़ के मैं,
तुझे ढूँढती फिरू दरबदर|

तेरा रंग साया बहार का,
तेरा रूप आईना प्यार का
तुझे आ नज़र में छुपा लूँ मैं,
तुझे लग ना जाये कहीं नज़र

तेरा साथ है तो है ज़िन्दगी,
तेरा प्यार है तो है रोशनी
कहाँ दिन ये ढल जाये क्या पता,
कहाँ रात हो जाये क्या खबर|

मेरे हमसफ़र, मेरे हमसफ़र|

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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ज़ुबां पे दर्द भरी दास्तां चली आई!

आज फिर से मैं हम सबके प्यारे मुकेश जी का एक और बहुत प्यारा गीत शेयर कर रहा हूँ, यह गीत है पुरानी फिल्म मर्यादा से है, जिसे आनंद बक्षी जी ने लिखा था और कल्याणजी आनंद जी के संगीत निर्देशन में मुकेश जी ने इसे अनोखे अंदाज में गाया है |

ज़िंदगी में ऐसा भी होता है और अक्सर होता है कि हम खुशियों की आशा करते हैं और हमारे पाले ग़म ही पड़ते हैं, बस ऐसे ही कुछ भाव हैं इस गीत में|

लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी का यह दर्द भरा गीत:

ज़ुबां पे दर्द भरी दास्तां चली आई,
बहार आने से पहले खिजां चली आई|

खुशी की चाह में मैंने उठाये रंज बड़े
मेरा नसीब कि मेरे क़दम जहाँ भी पड़े,
ये बदनसीबी मेरी भी वहाँ चली आई|
ज़ुबां पे दर्द भरी दास्तां चली आई |

उदास रात है वीरान दिल की महफ़िल है,
न हमसफ़र है कोई और न कोई मंज़िल है
ये ज़िंदगी मुझे लेकर कहाँ चली आई|

ज़ुबां पे दर्द भरी दास्तां चली आई
बहार आने से पहले खिजां चली आई|



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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ज़िंदगी, कैसी है पहेली!

फिल्म आनंद, जिसमें एक जमे हुए सुपर स्टार राजेश खन्ना थे और उनके सामने ये थे अपेक्षाकृत नए कलाकार अमिताभ बच्चन, लेकिन इस फिल्म से ही अमिताभ बच्चन ने भी दर्शकों के मन पर अपनी अमिट छाप छोड़ी थी| फिल्म आनंद में बहुत से लाजवाब गाने थे, जिनमें मुकेश जी का गाया गीत – ‘कहीं दूर जब दिन ढल जाए’ भी है और भी एक से बढ़कर एक गीत थे|

खैर आज मैं आनंद फिल्म का जो गीत शेयर कर रहा हूँ, वह मन्ना डे जी का गाया हुआ है, गीत लिखा है योगेश जी ने और सलिल चौधरी जी के संगीत निर्देशन में मन्ना डे साहब ने जीवन दर्शन को समझाने वाले इस गीत को बड़े सुंदर अंदाज में गाया है| लीजिए प्रस्तुत हैं इस गीत के बोल-


ज़िंदगी …
कैसी है पहेली, हाए
कभी तो हंसाये
कभी ये रुलाये
ज़िंदगी …

कभी देखो मन नहीं जागे
पीछे पीछे सपनों के भागे
एक दिन सपनों का राही
चला जाए सपनों के आगे कहाँ
ज़िंदगी …

जिन्होने सजाए यहाँ मेले
सुख-दुख संग-संग झेले
वही चुनकर ख़ामोशी
यूँ चले जाएं अकेले कहाँ
ज़िंदगी …



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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हम तुम ना जुदा होंगे!

मोहम्मद रफी साहब का नाम, भारतीय सिने संगीत की दुनिया में किसी परिचय का मोहताज नहीं है| जिस तरह नायकों की दुनिया में राज कपूर, दिलीप कुमार और देव आनंद की तिकड़ी प्रसिद्ध थे, उसी प्रकार पुरुष गायकों की दुनिया में रफी, मुकेश और किशोर कुमार ऐसे नाम हैं जिनको भुलाया जाना मुश्किल है|

आज और भूमिका बांधे बिना अब मैं फिल्म उस्तादों के उस्ताद से असद भोपाली साहब के लिखे एक गीत के बोल शेयर कर रहा हूँ, जिसे रवि जी के संगीत निर्देशन में, रफी साहब ने अपने लाजवाब अंदाज में गाया है| लीजिए प्रस्तुत हैं इस गीत के बोल-



सौ बार जनम लेंगे
सौ बार फ़ना होंगे
ऐ जाने वफा फिर भी
हम तुम ना जुदा होंगे|
सौ बार जनम लेंगे,
सौ बार फ़ना होंगे|

किस्मत हमें मिलने से
रोकेगी भला कब तक,
इन प्यार की राहों में
भटकेगी वफ़ा कब तक,
कदमो के निशा खुद ही
मंजिल का पता होंगे|
सौ बार जनम लेंगे
सौ बार फ़ना होगे|


ये कैसी उदासी है
जो हुस्न पे छाई है,
हम दूर नहीं तुमसे
कहने को जुदाई है,
अरमान भरे दो दिल
फिर एक जगह होंगे|

सौ बार जनम लेंगे
सौ बार फ़ना होंगे|
ऐ जाने वफा फिर भी
हम तुम ना जुदा होंगे|
सौ बार जनम लेंगे
सौ बार फ़ना होंगे|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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अंखियों का नूर है तू!

आज फिर से मैं हम सबके प्यारे मुकेश से संबंधित एक और बहुत प्यारा गीत शेयर कर रहा हूँ, यह एक युगल गीत है जो मुकेश जी ने सुमन कल्याणपुर जी के साथ मिलकर गाया है |

फिल्म ‘जौहर महमूद इन गोवा ‘ जो कि किसी बड़े बैनर की और ज्यादा समय तक याद रहने वाली फिल्म नहीं थी, लेकिन उसके लिए क़मर जलालाबादी जी के लिखे इस गीत को कल्याणजी आनंदजी ने अपने संगीत से सजाया है और मुकेश जी और सुमन कल्याणपुर जी ने इसे लाज़वाब अंदाज़ में गाया है|

इस गीत में प्रेम और रोमांस का एक अलग अंदाज़ देखने को मिलता है, लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी और सुमन कल्याणपुर जी का यह सुरीला गीत:

Image result for Johar Mehmood In Goa Lyricist. Size: 120 x 160. Source: bestoftheyear.in


अँखियों का नूर है तू
अँखियों से दूर है तू
फिर भी पुकारे चले जायेंगे,
तू आये ना आये
फिर भी पुकारे चले जायेंगे |

दिल में पयाम तेरा,
लब पे है नाम तेरा
हो के दीवाने तेरे प्यार में,
लो आये जी आये
हो के दीवाने तेरे प्यार में|


ओ मेरे हमराज़ कहाँ है,
मुझको दे आवाज़ कहाँ है
प्यार की आँखों से तुम देखो,
इश्क़ वहीं है हुस्न जहाँ है |

छुप छुप के आनेवाले,
दिल को जलानेवाले
चुपके से आ जा मेरे सामने
तू आजा रे आ जा,
चुपके से आ जा मेरे सामने

इसलिए आया हूँ मैं छुपके,
देखके हमको दुनिया जले ना
प्यार की महफ़िल कितनी अनोखी,
नूर है लेकिन दीप जले ना|

यादों के दाग़ ले के,
दिल के चिराग ले के
कब से खड़ा हूँ तेरे सामने
तू माने ना माने
कब से खड़ा हूँ तेरे सामने|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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हम बहते धारे हैं!

आज फिर से मैं हम सबके प्यारे मुकेश जी का गाया एक और बहुत प्यारा गीत शेयर कर रहा हूँ, यह एक युगल गीत है जो मुकेश जी ने आशा भौंसले जी के साथ मिलकर गाया है |

फिल्म ‘रफ्तार’ के लिए अभिलाष जी के लिखे इस गीत को सोनिक ओमी जी ने अपने संगीत से सजाया है और मुकेश जी और आशा जी ने इसे लाज़वाब अंदाज़ में गाया है|

इस गीत में जीवन को लेकर एक दर्शन भी देने का प्रयास किया गया है, लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी और आशा जी का यह सुरीला गीत:


संसार है इक नदिया
दुःख सुख दो किनारे हैं
न जाने कहाँ जाएं
हम बहते धारे हैं|
संसार है इक नदिया|

चलते हुए जीवन की
रफ़्तार में एक लय है
इक राग में, इक सुर में
संसार की हर शै है,
संसार की हर शे है|


इक तार पे गर्दिश में
ये चाँद सितारे हैं,
न जाने कहाँ जाएं
हम बहते धारे हैं|
संसार है इक नदिया|


धरती पे अम्बर की
आँखों से बरसती हैं
इक रोज़ यही बूंदें
फिर बादल बनती हैं|
इस बनने बिगड़ने के
दस्तूर में सारे हैं|
न जाने कहाँ जाएं
हम बहते धारे हैं|


कोई भी किसी के लिए
अपना न पराया है
रिश्तों के उजाले में
हर आदमी साया है,
हर आदमी साया है|

क़ुदरत के भी देखो तो
ये खेल निराले हैं
न जाने कहाँ जाएं
हम बहते धारे हैं |
संसार है इक नदिया|


है कौन वो दुनिया में
न पाप किया जिसने
बिन उलझे कांटों से
हैं फूल चुने किसने,
हैं फूल चुने किसने|
बेदाग नहीं कोई
यहां पापी सारे हैं
न जाने कहाँ जाएं
हम बहते धारे हैं|

संसार है इक नदिया
दुःख सुख दो किनारे हैं
न जाने कहाँ जाएं
हम बहते धारे हैं |


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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मतवाली नार!

एक बार फिर से मैं हम सबके प्यारे मुकेश जी का गाया एक और बहुत प्यारा गीत शेयर कर रहा हूँ जो राग मारू बिहाग पर आधारित है |

फिल्म ‘एक फूल चार कांटे’ के लिए शैलेन्द्र जी के लिखे इस गीत को शंकर जयकिशन की सुरीली जोड़ी के संगीत निर्देशन में मुकेश जी ने लाज़वाब अंदाज़ में गाया है|

लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी का यह अलग तरह का गीत:



मतवाली नार ठुमक ठुमक चली जाये
इन कदमों पे किस का जिया ना झुक जाये
मतवाली नार …

फूल बदन मुखड़ा यूँ दमके
बादल में ज्यों बिजली चमके
गीत सुना के तू छम छम के
ललचाये, छुप जाये, आय हाय
मतवाली नार …

ये चंचल कजरारी आंखें
ये चितचोर शिकारी आंखें
गई दिल चीर कटारी आंखें
मुस्काये, शरमाये, झुक जाये
मतवाली नार …


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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