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संसार है एक नदिया!

साथियो आज मैं आपके साथ शेयर कर रहा हूँ 1975 में रिलीज़ हुई फ़िल्म- ‘रफ्तार’ का एक गीत जिसे – अभिलाष जी ने लिखा था। इस शानदार गीत को मेरे परम प्रिय गायक मुकेश जी ने आशा भौंसले जी के साथ गाया था और इसके लिए संगीत दिया था सोनिक जी ने। इस गीत को मदनपुरी जी और अभिनेत्री मौसमी चटर्जी जी पर फिल्माया गया था।

इस गीत में, एक अलग प्रकार से जीवन दर्शन प्रस्तुत किया गया है और यह बहुत सुंदर गीत है-

संसार है इक नदिया
दुःख सुख दो किनारे हैं!
न जाने कहाँ जाएँ
हम बहते धारे हैं!!
संसार है इक नदिया….


चलते हुए जीवन की,
रफ़्तार में एक लय है!
इक राग में इक सुर में,
संसार की हर शय है !!
संसार की हर शय है!!


इक तार पे गर्दिश में,
ये चाँद सितारे है!
न जाने कहाँ जाएँ,
हम बहते धारे हैं!!
संसार है इक नदिया….


धरती पे अम्बर की,
आँखों से बरसती हैं!
इक रोज़ यही बूंदें,
फिर बादल बनती हैं!
इस बनने बिगड़ने के,
दस्तूर में सारे हैं!


कोई भी किसी के लिए,
अपना न पराया है!
रिश्तों के उजाले में,
हर आदमी साया है!
हर आदमी साया है!!

क़ुदरता के भी देखो तो,
ये खेल निराले हैं!
न जाने कहाँ जाएँ,
हम बहते धारे हैं!!
संसार है इक नदिया……


है कौन वो दुनिया में,
न पाप किया जिसने!
बिन उलझे कांटो से,
हैं फूल चुने किसने!
हैं फूल चुने किसने!!
बेदाग नहीं कोई,
यहां पापी सारे हैं!
संसार है एक नदिया!


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|

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बस एक निगाह प्यार की!

आज मोहम्मद रफी साहब का एक गाना शेयर कर रहा हूँ| रफी साहब ने हर तरह के गाने गाए हैं, और आज का गाना मस्ती से भरा हुआ है| वर्ष 1965 में रिलीज़ हुई फिल्म- मेरे सनम के लिए मजरूह सुल्तानपुरी साहब के लिखे इस गीत का संगीत दिया है ओ पी नैयर साहब ने|


लीजिए इस मस्ती भरे गीत का आनंद लीजिए-

पुकारता चला हूँ मैं
गली गली बहार की,
बस एक छाँव जुल्फ की
बस एक निगाह प्यार की|

ये दिल्लगी ये शोखियाँ सलाम की
यही तो बात हो रही है काम की,
कोई तो मुड़ के देख लेगा इस तरफ
कोई नज़र तो होगी मेरे नाम की|
पुकारता चला हूँ मैं…


सुनी मेरी सदा तो किस यकीन से
घटा उतर के आ गई ज़मीन पे,
रही यही लगन तो ऐ दिल-ए-जवां
असर भी हो रहेगा एक हसीन पे|
पुकारता चला हूँ मैं …


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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चांद आहें भरेगा!

आज एक बार फिर मैं अपने प्रिय गायक- मुकेश जी का गाया एक गीत शेयर करूंगा| नायिका के सौंदर्य का वर्णन करने वाले अनेक गीत आपने सुने होंगे, लेकिन इस ऊंचाई वाला गीत बहुत मुश्किल से सुनने को मिलता है, और फिर मुकेश जी की आवाज़ तो इसमें अलग से जान डाल ही रही है|

लीजिए  फिल्म- ‘फूल बने अंगारे’ के लिए आनंद बख्शी जी के लिखे इस गीत का आनंद लीजिए, जिसे कल्याण जी आनंद जी के संगीत निर्देशन में मुकेश जी ने गाया है-

चांद आहें भरेगा,
फूल दिल थाम लेंगे,
हुस्न की बात चली तो,
सब तेरा नाम लेंगे|


आँखें नाज़ुक सी कलियां,
बात मिश्री की डलियां,
होंठ गंगा के साहिल,
ज़ुल्फ़ें जन्नत की गलियां|
तेरी खातिर फ़रिश्ते,
सर पे इल्ज़ाम लेंगे|

हुस्न की बात चली तो,
सब तेरा नाम लेंगे|


चुप न होगी हवा भी,
कुछ कहेगी घटा भी,
और मुमकिन है तेरा,
ज़िक्र कर दे खुदा भी|
फिर तो पत्थर ही शायद,
ज़ब्त से काम लेंगे|

हुस्न की बात चली तो,
सब तेरा नाम लेंगे|


चाँद आहें भरेगा,
फूल दिल थाम लेंगे,
हुस्न की बात चली तो,
सब तेरा नाम लेंगे|

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|

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इन आँखों का हर इक आँसू ,मुझे मेरी क़सम दे दो!

प्रसिद्ध शायर और फिल्मी गीतकार- जनाब मेहंदी अली खान साहब का एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| उन्होंने फिल्मों को अनेक सुंदर गीत दिए हैं और 1964 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘आपकी परछाइयाँ’ का यह गीत भी काफी लोकप्रिय हुआ था| मदन मोहन जी के संगीत निर्देशन में यह गीत लता मंगेशकर जी ने अपने अनूठे अंदाज़ में गाया है|

लीजिए राजा मेहंदी अली खान साहब के लिखे इस गीत का आनंद लीजिए-


अगर मुझ से मुहब्बत है मुझे सब अपने ग़म दे दो,
इन आँखों का हर इक आँसू मुझे मेरी क़सम दे दो|
अगर मुझ से …

तुम्हारे ग़म को अपना ग़म बना लूँ तो क़रार आए,
तुम्हारा दर्द सीने में छुपा लूँ तो क़रार आए,
वो हर शय जो तुम्हें दुख दे मुझे मेरे सनम दे दो|
अगर मुझ से …


शरीक-ए-ज़िन्दगी को क्यूँ शरीक-ए-ग़म नहीं करते,
दुखों को बाँट कर क्यूँ इन दुखों को कम नहीं करते,
तड़प इस दिल की थोड़ी-सी मुझे मेरे सनम दे दो|
अगर मुझ से …


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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तेरी मेहंदी लेकर दिन उगा!

नीरज जी हिन्दी साहित्यिक मंचों के अत्यंत सुरीले और सृजनशील गीतकार थे, जिन्होंने फिल्म जगत में भी अपना विशेष स्थान बनाया था|

आज नीरज जी का लिखा एक मस्ती भरा फिल्मी गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे 1971 में रिलीज़ हुई फिल्म- शर्मीली के लिए सचिन देव बर्मन जी के संगीत निर्देशन में किशोर कुमार जी ने अपने मस्ती भरे अंदाज़ में गाया था|


लीजिए आज प्रस्तुत है नीरज जी का लिखा ये मस्ती भरा गीत-

ओ मेरी, ओ मेरी, ओ मेरी शर्मीली,
आओ ना, तड़पाओ ना|

तेरा काजल लेकर रात बनी, रात बनी
तेरी मेंहदी लेकर दिन उगा, दिन उगा,
तेरी बोली सुनकर सुर जगे, सुर जगे
तेरी खुशबू लेकर फूल खिला, फूल खिला|
जान-ए-मन तू है कहाँ
ओ मेरी शर्मीली…


तेरी राहों से गुज़रे जब से हम, जब से हम
मुझे मेरी डगर तक याद नहीं, याद नहीं,
तुझे देखा जब से दिलरुबा, दिलरुबा
मुझे मेरा घर तक याद नहीं, याद नहीं|
जान-ए-मन तू है कहाँ
ओ मेरी शर्मीली…


ओ नीरज नयना आ ज़रा, आ ज़रा
तेरी लाज का घूँघट खोल दूं, खोल दूं
तेरे आँचल पर कोई गीत लिखूँ, गीत लिखूँ
तेरे होंठों में अमृत घोल दूँ, घोल दूँ
जान-ए-मन तू है कहाँ
ओ मेरी शर्मीली…


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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टूटा नहीं दिल ये अभी!

आज मैं फिर से अपने प्रिय गायक मुकेश जी का एक खूबसूरत गीत शेयर कर रहा हूँ| फिल्म-दूल्हा-दुल्हन के लिए यह गीत राज कपूर जी पर फिल्माया गया था, गीत के लेखक थे- इंदीवर और संगीतकार थे – कल्याणजी-आनंदजी|
वैसे भी मुकेश जी उदासी भरे नग़मों के शहंशाह माने जाते हैं, हालांकि उन्होंने मस्ती भरे गीत भी बहुत गाये हैं|
लीजिए आज प्रस्तुत है मुकेश जी का उदासी भरा, दिल टूटने की स्थितियों का यह गीत, जीवन की कुछ स्थितियों को चित्रित करने के लिए ऐसे गीत भी बहुत ज़रूरी हैं-


तुम सितम और करो
टूटा नहीं दिल ये अभी,
हम भी क्या याद करेंगे
तुम्हें चाहा था कभी|
तुम सितम और करो
टूटा नहीं दिल ये अभी|


ये वही होठ हैं
जो गीत मेरे गाते थे,
ये वही गेसू हैं
जो मुझपे बिखर जाते थे|
आज क्या हो गया
क्यों हो गए बेगाने सभी|
तुम सितम और करो
टूटा नहीं दिल ये अभी|


अपने ख्वाबों का जहाँ
मुझ में कभी ढूँढा था,
तुम वही हो कि कभी
तुमने मुझे पूजा था|
देखते हो हमें ऐसे कि
न देखा हो कभी|
तुम सितम और करो
टूटा नहीं दिल ये अभी|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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मेरा सूना पड़ा रे संगीत !

मेरे प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और गीत आज शेयर कर रहा हूँ| आज का ये 1957 में रिलीज़ हुई फिल्म- रानी रूपमती के लिए पंडित भरत व्यास जी ने लिखा था और एस एन त्रिपाठी जी के संगीत निर्देशन में मुकेश जी ने इसे बड़े मनमोहक अंदाज़ में गाया है|


लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी का यह एक अमर गीत-

आ लौट के आजा मेरे मीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं,
मेरा सूना पड़ा रे संगीत, तुझे मेरे गीत बुलाते हैं|

बरसे गगन मेरे बरसे नयन, देखो तरसे है मन, अब तो आजा|
शीतल पवन ये लगाए अगन,
ओ सजन अब तो मुखड़ा दिखा जा|
तूने भली रे निभाई प्रीत,
तूने भली रे निभाई प्रीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं|
आ लौट…

एक पल है हँसना एक पल है रोना, कैसा है जीवन का खेला|
एक पल है मिलना एक पल बिछड़ना,
दुनिया है दो दिन का मेला|
ये घड़ी न जाए बीत,
ये घड़ी न जाए बीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं|
आ लौट…


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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दिल को वही काम आ गया!

आज फिर से मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और गीत शेयर कर रहा हूँ| खास बात ये है आज का ये गीत मुकेश जी ने शम्मी कपूर जी के लिए गाया था, शायद मुकेश जी ने बहुत कम गीत गाये होंगे शम्मी कपूर जी के लिए, मुझे तो कोई और याद नहीं है| फिल्म- ‘ब्लफ़ मास्टर’ के लिए यह गीत- राजेन्द्र कृष्ण जी ने लिखा था और इसका संगीत दिया था – आनंद वीर जी शाह ने|


लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी का गाया, कुछ अलग किस्म का यह गीत, जिसमें प्यार करने न करने के बारे में कुछ तर्क-वितर्क किया गया है-

सोचा था प्यार हम न करेंगे,
सूरत पे यार हम न मरेंगे,
लेकिन किसी पे दिल आ गया|
सोचा था प्यार हम न करेंगे||

बहुत ख़ाक दुनिया की छानी थी हमने,
अब तक किसी की न मानी थी हमने,
धोखे में दिल कैसे आ गया|
सोचा था प्यार हम न करेंगे|


अगर दिल न देते बड़ा नाम करते,
मगर प्यार से बड़ा काम करते,
दिल को यही काम आ गया|


सोचा था प्यार हम न करेंगे
सूरत पे यार हम न मरेंगे
फिर भी किसी पे दिल आ गया|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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हम आपकी आँखों से नींदें ही उड़ा दें तो!

आज गुरुदत्त जी की फिल्म-प्यासा का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे रफी साहब और गीता दत्त जी ने गाया है| इसमें यही सब बताया गया कि नायिका का प्यार पाने के लिए आशिक़ महोदय किस हद तक जाने को तैयार रहते हैं और क्या-क्या सहना पड़ता है मासूम से आशिक़ को|


यह मजेदार गीत, जिसका संगीत दिया है एस डी बर्मन साहब ने और गीतकार हैं – साहिर लुधियानवी जी| लीजिए प्रस्तुत है यह गीत-

हम आपकी आँखों में, इस दिल को बसा दें तो,
हम मूँद के पलकों को, इस दिल को सज़ा दें तो|

इन ज़ुल्फ़ों में गूँथेंगे हम फूल मुहब्बत के,
ज़ुल्फ़ों को झटक कर हम ये फूल गिरा दें तो|
हम आपकी आँखों में…

हम आपको ख्वाबों में ला, ला के सतायेंगे,
हम आपकी आँखों से नींदें ही उड़ा दें तो|
हम आपकी आँखों में…

हम आपके कदमों पर गिर जायेंगे ग़श खाकर,
इस पर भी न हम अपने आंचल की हवा दें तो|
हम आपकी आँखों में…

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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तेरा नाम ही लेना छोड़ दिया!

आज फिर से मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और गीत शेयर कर रहा हूँ| आज का ये शानदार गीत 1965 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘सहेली’ से है, जिसे लिखा है – इंदीवर जी ने और कल्याणजी आनंद जी के संगीत निर्देशन में इसे मुकेश जी ने अपने लाजवाब अंदाज़ में गाया है|

जैसे जीवन में बहुत सी गतिविधियों का हमें कभी समापन करना पड़ जाता है, कभी ऐसी भी परिस्थिति आती है कि हमें प्रेम का भी समापन करना पड़ जाता है, यह गीत कुछ ऐसी ही परिस्थिति को बड़े प्रभावी ढंग से दर्शाता है|


लीजिए प्रस्तुत है यह अमर गीत-

जिस दिल में बसा था प्यार तेरा
उस दिल को कभी का तोड़ दिया, हाय, तोड़ दिया
बदनाम न होने देंगे तुझे
तेरा नाम ही लेना छोड़ दिया, हाय, छोड़ दिया|
जिस दिल में बसा था प्यार तेरा|

जब याद कभी तुम आओगे
समझेंगे तुम्हें चाहा ही नहीं
राहों में अगर मिल जाओगे
सोचेंगे तुम्हें देखा ही नहीं
जो दर पे तुम्हारे जाती थीं
उन राहों को हमने छोड़ दिया हाय, छोड़ दिया|
जिस दिल में बसा था प्यार तेरा
|

हम कौन किसी के होते हैं
कोई हमको याद करेगा क्यूं
अपने दो आंसू भी हम पर
कोई बरबाद करेगा क्यूं – २
उस मांझी को भी गिला हमसे
मंझधार में जिसने छोड़ दिया, हाय, छोड़ दिया|
जिस दिल में बसा था प्यार तेरा …



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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