प्यार भी दरिया है उतर जाएगा!

आख़िरश वो भी कहीं रेत पे बैठी होगी,
तेरा ये प्यार भी दरिया है उतर जाएगा|

परवीन शाकिर

इक ज़ख़्म है भर जाएगा!

हम तो समझे थे कि इक ज़ख़्म है भर जाएगा,
क्या ख़बर थी कि रग-ए-जाँ में उतर जाएगा|

परवीन शाकिर

ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा!

वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा,
मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा|

परवीन शाकिर

अजब ख़्वाहिशें अंगड़ाई की!

अब भी बरसात की रातों में बदन टूटता है,
जाग उठती हैं अजब ख़्वाहिशें अंगड़ाई की|

परवीन शाकि

जलती हुई पेशानी पे जब हाथ रखा!

उसने जलती हुई पेशानी पे जब हाथ रखा,
रूह तक आ गई तासीर मसीहाई की|

परवीन शाकि

क़यामत शब-ए-तन्हाई की!

तेरा पहलू तिरे दिल की तरह आबाद रहे,
तुझ पे गुज़रे न क़यामत शब-ए-तन्हाई की|

परवीन शाकिर

यही बात है अच्छी मिरे हरजाई की!

वो कहीं भी गया लौटा तो मिरे पास आया,
बस यही बात है अच्छी मिरे हरजाई की|

परवीन शाकिर

मगर बात है रुस्वाई की!

कैसे कह दूँ कि मुझे छोड़ दिया है उसने,
बात तो सच है मगर बात है रुस्वाई की|

परवीन शाकिर

फैल गई बात शनासाई की!

कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की,
उसने ख़ुशबू की तरह मेरी पज़ीराई की|

परवीन शाकिर

नासमझ हवा पूछ रही है इक पता!

शाम की ना-समझ हवा पूछ रही है इक पता,
मौज-ए-हवा-ए-कू-ए-यार कुछ तो मिरा ख़याल भी|

परवीन शाकिर