बंसी से बन्दूक बनाते, हम वो प्रेम पुजारी !

कल मैंने बाल स्वरूप राही जी की एक गजल प्रस्तुत की थी, जिसमें ताजमहल का ज़िक्र आया था| तुरंत मुझे स्वर्गीय नीरज जी का एक गीत याद आ गया| यह गीत फिल्म- प्रेम पुजारी के लिए रफी साहब की आवाज़ और सचिन दा के संगीत निर्देशन में बहुत सुंदर ढंग से फिल्माया गया है| अभी … Read more

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