वह व्याकरण खो गया!

हमने पढ़कर जिसे प्यार सीखा कभी
एक गलती से वह व्याकरण खो गया|

रामावतार त्यागी

हमारा तुम्हारा गगन खो गया!

यह जमीं तो कभी भी हमारी न थी,
वह हमारा तुम्हारा गगन खो गया|

रामावतार त्यागी

जो दिया था वचन खो गया!

यह शहर पा लिया, वह शहर पा लिया,
गाँव को जो दिया था वचन खो गया|

रामावतार त्यागी

मिट्टी के पीछे रतन खो गया!

तन बचाने चले थे कि मन खो गया,
एक मिट्टी के पीछे रतन खो गया|

रामावतार त्यागी

जिस ओर को दुआर है!

रस्ता न भूलिएगा, दुखों के मकान का,
जिस ओर को दुआर है, जामुन का पेड़ है।

सूर्यभानु गुप्त

सावन की यादगार है!

बैठा है तनहा बाग में, एक बूढ़ा आदमी,
सावन की यादगार है, जामुन का पेड़ है।

सूर्यभानु गुप्त

इक तेज घुड़सवार है!

टापें बिछा रही हैं, अंधेरे में जामुनें,
इक तेज घुड़सवार है, जामुन का पेड़ है।

सूर्यभानु गुप्त