नग़मों की खिलती कलियां चुनने वाले!

आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ- अज्ञेय जी की एक कविता है-‘नए कवि से’, काफी लंबी कविता है, उसका कुछ हिस्सा यहाँ उद्धृत कर रहा हूँ-   आ, तू आ, हाँ, आ, मेरे पैरों की छाप-छाप पर रखता पैर, मिटाता उसे, मुझे मुँह भर-भर गाली देता- आ, तू आ।   … Read more

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