मैंने उनके भी गिरेबान फटे देखे हैं!

स्वर्गीय रामावतार त्यागी जी का एक गीत मैं आज शेयर कर रहा हूँ| त्यागी जी काव्य मंच पर अपनी उपस्थिति से अलग प्रकार का वातावरण सृजित करते थे| वे सामान्यतः खुद्दारी से भरी अभिव्यक्ति करते थे, वैसे प्रेम गीत भी उन्होंने बहुत सुंदर लिखे हैं| उनकी कुछ पंक्तियाँ जो अक्सर याद आती हैं, वे हैं … Read more

सोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूं !

आज एक बार फिर से मैं स्वर्गीय राहत इन्दौरी जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| राहत जी अपने सबसे अलग अंदाज़ ए बयां के लिए प्रसिद्ध थे| जो एक अलग प्रकार का ‘पंच’ उनकी रचनाओं में आता था वो पाठकों और श्रोताओं का मन मोह लेता था| लीजिए प्रस्तुत है राहत इन्दौरी साहब … Read more

खामोशी पहचाने कौन 5

किरन-किरन अलसाता सूरजपलक-पलक खुलती नींदेंधीमे-धीमे बिखर रहा हैज़र्रा-ज़र्रा जाने कौन । निदा फाज़ली

क्यों विष जान पिया करता है!

आज मैं स्वर्गीय बलबीर सिंह जी ‘रंग’ का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| ‘रंग’ जी अपनी अलग प्रकार की अभिव्यक्ति शैली के लिए जाने जाते थे| इस गीत में ‘रंग’ जी ने अपने अंदाज़ में यह कहा है कि कवि गीत क्यों लिखता है| बलबीर सिंह ‘रंग’ जी की बहुत लोकप्रिय पंक्तियाँ जो मैं … Read more

दूर से देखता हूँ – रवीन्द्रनाथ ठाकुर

आज प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी … Read more

पढ़कर भी क्या होगा!

हिन्दी नवगीत के एक सशक्त हस्ताक्षर स्वर्गीय कुमार शिव जी का एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| उनकी एक गीत पंक्ति जो मैंने कई बार अपने आलेखों में दोहराई है, वो है: फ्यूज बल्बों के अद्भुद समारोह में,रोशनी को शहर से निकाला गया| एक और काले कपड़े पहने हुए सुबह देखी,देखी हमने अपनी सालगिरह … Read more

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