जो ज़हर पिए जाते हैं!

अपनी तारीख़-ए-मोहब्बत के वही हैं सुक़रात,
हँस के हर साँस पे जो ज़हर पिए जाते हैं|

शमीम जयपुरी

बनकर सुक़रात, बरतता हूँ!

इक ज़हर के दरिया को दिन-रात बरतता हूँ ।
हर साँस को मैं, बनकर सुक़रात, बरतता हूँ ।

राजेश रेड्डी

जहर के प्यालों की तरह!

तेरे बिन, रात के हाथों पे ये तारों के अयाग,
खूबसूरत हैं मगर जहर के प्यालों की तरह|

जां निसार अख़्तर

वफ़ा ढूंढ रहे हैं!

इस अहद के इंसां मे वफ़ा ढूंढ रहे हैं,
हम ज़हर की शीशी मे दवा ढूंढ रहे हैं|

राजेश रेड्डी

दवा हो जाएगा!

मैं ख़ुदा का नाम लेकर पी रहा हूँ दोस्तो,
ज़हर भी इसमें अगर होगा, दवा हो जाएगा|

बशीर बद्र

कि मैं ज़िन्दा हूँ अभी!

ज़हर पीने की तो आदत थी ज़माने वालों
अब कोई और दवा दो कि मैं ज़िन्दा हूँ अभी|

सुदर्शन फाक़िर

फिर रोशन कर ज़हर का प्याला

फिर रोशन कर ज़हर का प्याला चमका नई सलीबें,
झूठों की दुनिया में सच को ताबानी दे मौला|

निदा फ़ाज़ली