कभी तोड़ दिए जाते हैं!

आबगीनों की तरह दिल हैं ग़रीबों के ‘शमीम’ ,
टूट जाते हैं कभी तोड़ दिए जाते हैं|

शमीम जयपुरी

सच न बोलना!

स्वर्गीय बाबा नागार्जुन जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| नागार्जुन जी अपने किस्म के अनूठे कवि थे, फक्कड़पन के साथ जीवन जीने वाले और खरी बात कहने वाले|

लीजिए आज प्रस्तुत है बाबा नागार्जुन जी की यह कविता, गरीब मजदूरों का जो हाल उन्होंने देखा और ईमानदारी से और पूरी प्रभाविता के साथ उसको अभिव्यक्ति दी, लीजिए यह कविता प्रस्तुत है –

मलाबार के खेतिहरों को अन्न चाहिए खाने को,
डंडपाणि को लठ्ठ चाहिए बिगड़ी बात बनाने को!
जंगल में जाकर देखा, नहीं एक भी बांस दिखा!
सभी कट गए सुना, देश को पुलिस रही सबक सिखा!

जन-गण-मन अधिनायक जय हो, प्रजा विचित्र तुम्हारी है
भूख-भूख चिल्लाने वाली अशुभ अमंगलकारी है!
बंद सेल, बेगूसराय में नौजवान दो भले मरे
जगह नहीं है जेलों में, यमराज तुम्हारी मदद करे।

ख्याल करो मत जनसाधारण की रोज़ी का, रोटी का,
फाड़-फाड़ कर गला, न कब से मना कर रहा अमरीका!
बापू की प्रतिमा के आगे शंख और घड़ियाल बजे!
भुखमरों के कंकालों पर रंग-बिरंगी साज़ सजे!


ज़मींदार है, साहुकार है, बनिया है, व्योपारी है,
अंदर-अंदर विकट कसाई, बाहर खद्दरधारी है!
सब घुस आए भरा पड़ा है, भारतमाता का मंदिर
एक बार जो फिसले अगुआ, फिसल रहे हैं फिर-फिर-फिर!

छुट्टा घूमें डाकू गुंडे, छुट्टा घूमें हत्यारे,
देखो, हंटर भांज रहे हैं जस के तस ज़ालिम सारे!
जो कोई इनके खिलाफ़ अंगुली उठाएगा बोलेगा,
काल कोठरी में ही जाकर फिर वह सत्तू घोलेगा!

माताओं पर, बहिनों पर, घोड़े दौड़ाए जाते हैं!
बच्चे, बूढ़े-बाप तक न छूटते, सताए जाते हैं!
मार-पीट है, लूट-पाट है, तहस-नहस बरबादी है,
ज़ोर-जुलम है, जेल-सेल है। वाह खूब आज़ादी है!


रोज़ी-रोटी, हक की बातें जो भी मुंह पर लाएगा,
कोई भी हो, निश्चय ही वह कम्युनिस्ट कहलाएगा!
नेहरू चाहे जिन्ना, उसको माफ़ करेंगे कभी नहीं,
जेलों में ही जगह मिलेगी, जाएगा वह जहां कहीं!

सपने में भी सच न बोलना, वर्ना पकड़े जाओगे,
भैया, लखनऊ-दिल्ली पहुंचो, मेवा-मिसरी पाओगे!
माल मिलेगा रेत सको यदि गला मजूर-किसानों का,
हम मर-भुक्खों से क्या होगा, चरण गहो श्रीमानों का!


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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चुनौती कोरोना और लॉक डाउन की!

एक बार फिर से आज कोरोना के बारे में चर्चा करने का मन है। यद्यपि हमारे देश का निष्पादन पश्चिम के देशों के मुकाबले कहीं अच्छा रहा है, शायद इसमें जलवायु और बचपन में लगने वाले टीकों का भी कुछ योगदान हो। लेकिन जो भी हो, ऐसा स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि पिछले कुछ दिनों से मामले निरंतर बढ़ रहे हैं और पूरी संभावना है कि लॉक डाउन की अवधि को और बढ़ाना पड़ेगा।

 

हमारी राष्ट्रीय सरकार और प्रदेश सरकारों द्वारा काफी कदम उठाए जा रहे हैं, जो संभव है इस अचानक आई महामारी के संदर्भ में पर्याप्त न हों। ऐसे में कुछ नागरिकों का व्यवहार ऐसा भी है जिससे लगता है कि उनका इरादा सरकार के प्रयासों को फेल कराने का ही हो। उन्होंने जैसे ऐसा माना हुआ है कि वे तो मरेंगे ही बहुत से लोगों को और साथ में लेकर मरेंगे। ऐसे लोगों के साथ वही व्यवहार किया जाना चाहिए, जैसा शातिर अपराधियों के साथ किया जाता है।

मुझे पूरा विश्वास है कि हम सब मिलकर इस महासंकट का मुकाबला सफलतापूर्वक कर ही लेंगे। बहुत सी समस्याएं इसके साथ और भी जुड़ी हैं जिनसे निपटना होगा, जैसे फसलें खेतों में तैयार हैं, उनकी कटाई के लिए मजदूर और उनको बाजार तक पहुंचाने के लिए यातायात के साधन, उसकी अनुमति अभी नहीं है। इन सबका भी समाधान खोजना होगा। सरकार द्वारा यथासंभव आसपास ही कृषि उत्पादों की खरीद और उनको गोदाम तक पहुंचाने के प्रयास किए जाएंगे।

सबसे बड़ी समस्या मेरे विचार में उन लोगों की है जो दैनिक मजदूर हैं, रोज कुआं खोदकर पानी पीते हैं। हमने देखा कि किस प्रकार उनकी भगदड़ मची थी जब वे जान की परवाह ने करते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार की तरफ अपने घरों के लिए चल दिए थे!
सरकार द्वारा गरीब और बेसहारा लोगों को भोजन और कुछ आमदनी उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए हैं, लेकिन मैं एक बार फिर से दोहराना चाहता हूँ कि सरकार के लिए सब लोगों तक पहुंचना संभव नहीं होता। जैसे एक उदाहरण तो टैक्सी चलाने वालों का ही है, जो बहुत बड़ी संख्या में आज बेकार बैठे हैं।

मेरा यही विनम्र अनुरोध है कि आर्थिक रूप से मजबूत लोग, जो दूसरों की मदद करने में सक्षम हैं, वे अपने आसपास ऐसे लोगों की तलाश करें और उनकी यथासंभव मदद करें, जिससे वे संकट की इस घड़ी से सुरक्षित बाहर आ सकें। खास तौर पर ऐसे लोग, जो किसी से मदद नहीं मांग पाते, वे यह भी नहीं बता पाते कि उनकी हालत बहुत खराब है। कहीं ऐसा न हो कि किसी को हमारे होते हुए कोई बदहाली में प्राण त्यागने पड़ें अथवा अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़े। यह हमारी सरकार और प्रत्येक जागरूक नागरिक के लिए परीक्षा की घड़ी है और मुझे विश्वास है कि हम इस चुनौती का भली प्रकार सामना करेंगे।

 

आज के लिए इतना ही।
नमस्कार।

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