मिरे पीछे ज़माना चल रहा है!

मिरी गुम-गश्तगी पर हँसने वालो,
मिरे पीछे ज़माना चल रहा है|

राहत इन्दौरी

चाहिएँ कितनी मोहब्बतें तुझे!

और ‘फ़राज़’ चाहिएँ कितनी मोहब्बतें तुझे,
माओं ने तेरे नाम पर बच्चों का नाम रख दिया|

अहमद फ़राज़

बस्ती के चौबारों में!

हर पनघट पर मेरे फ़साने, चौपालों पर ज़िक्र मेरा,
मेरी ही बातें होती हैं बस्ती के चौबारों में।

नक़्श लायलपुरी