ये क़र्ज़ अदा हो नहीं सकता!

पेशानी को सज्दे भी अता कर मिरे मौला,
आँखों से तो ये क़र्ज़ अदा हो नहीं सकता|

मुनव्वर राना

अँधेरे में इबादत नहीं करता!

देते हैं उजाले मिरे सज्दों की गवाही,
मैं छुप के अँधेरे में इबादत नहीं करता|

क़तील शिफ़ाई

बन्दगी में मेरा भला न हुआ!

क्या वो नमरूद की ख़ुदायी थी,
बन्दगी में मेरा भला न हुआ|

मिर्ज़ा ग़ालिब

मैं सर झुका रही थी कि!

ईमान जानिए कि इसे कुफ़्र जानिए,
मैं सर झुका रही थी कि तुम याद आ गए|

अंजुम रहबर

मस्जिद में ख़ुदा को सज्दे!

शेख़ करता तो है मस्जिद में ख़ुदा को सज्दे,
उस के सज्दों में असर हो ये ज़रूरी तो नहीं|

ख़ामोश ग़ाज़ीपुरी