किसी जुर्म की सज़ा ही नहीं!

धन के हाथों बिके हैं सब क़ानून
अब किसी जुर्म की सज़ा ही नहीं।

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

क्या जुर्म है पता ही नहीं!

ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं,
और क्या जुर्म है पता ही नहीं।

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

कोई फ़ैसला तो सुना दें!

सज़ा दें, सिला दें, बना दें, मिटा दें,
मगर वो कोई फ़ैसला तो सुना दें|

सुदर्शन फ़ाकिर