कुछ फूल मेरे हम-साये थे!

कैसे जाती मेरे बदन से बीते लम्हों की ख़ुश्बू,
ख़्वाबों की उस बस्ती में कुछ फूल मेरे हम-साये थे|

क़तील शिफ़ाई

ग़म-ए-हयात से कह दो ख़रीद लाये मुझे!

मैं अपनी ज़ात में नीलाम हो रहा हूँ “क़तील”,
ग़म-ए-हयात से कह दो ख़रीद लाये मुझे।

क़तील शिफ़ाई

सौ बार आज़माये मुझे!

वो महरबाँ है तो इक़रार क्यूँ नहीं करता
वो बदगुमाँ है तो सौ बार आज़माये मुझे।

क़तील शिफ़ाई

यही क़िस्मत हमारी है सितारों तुम तो सो जाओ!

हमें तो आज की शब पौ फटे तक जागना होगा,
यही क़िस्मत हमारी है सितारों तुम तो सो जाओ|

क़तील शिफ़ाई

ये बाज़ी हमने हारी है सितारों तुम तो सो जाओ!

तुम्हें क्या आज भी कोई अगर मिलने नहीं आया,
ये बाज़ी हमने हारी है सितारों तुम तो सो जाओ|

क़तील शिफ़ाई

हमें ये रात भारी है सितारों तुम तो सो जाओ!

Moon And Stars

हँसो और हँसते-हँसते डूबते जाओ ख़लाओं में,
हमें ये रात भारी है सितारों तुम तो सो जाओ|

क़तील शिफ़ाई

फिर चाहे दीवाना कर दे या अल्लाह!

एक बार फिर से आज मैं भारतीय उप महाद्वीप के मशहूर शायर क़तील शिफ़ाई साहब की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ|

वास्तव में ये कवि, शायर और कलाकार ही होते हैं जिनको देश की सीमा में नहीं बांधा जा सकता| क़तील साहब की बहुत सी ग़ज़लों को अनेक भारतीय और पाकिस्तानी गायकों ने गाया है और ये गायक कलाकार भी किसी देश की सीमा के मोहताज नहीं हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है, क़तील शिफाई साहब की यह ग़ज़ल –


दर्द से मेरा दामन भर दे या अल्लाह,
फिर चाहे दीवाना कर दे या अल्लाह|

मैनें तुझसे चाँद सितारे कब माँगे,
रौशन दिल बेदार नज़र दे या अल्लाह|

सूरज सी इक चीज़ तो हम सब देख चुके,
सचमुच की अब कोई सहर दे या अल्लाह|

या धरती के ज़ख़्मों पर मरहम रख दे,
या मेरा दिल पत्थर कर दे या अल्लाह|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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